Friday, March 15, 2019

Sine me daagh hai ke mitaaya na jayega

खुशबू है प्यार   इसको  छुपाया न जाएगा
बिन इस के एक   लम्हा गुज़ारा न जाएगा

कसमें ना   दीजिए कि   मुलाकात हो सके
मुमकिन है हमसे वादा निभाया ना जाएगा

लाज़िम है जिंदगी  में तेरा  साथ हर क़दम
हम  से क़दम  अकेले  उठाया   ना जाएगा

गुज़रेगी   रात युं ही    अंधेरे    में बिन  तेरे
तन्हा चिराग़   हमसे    जलाया   न जाएगा

कैसे भुला   दूं तुमको,   तेरी मीठी याद का
सीने में दाग़ है   कि    मिटाया   न जायेगा

दर्दे जुदाई   पूछो न   ज़ीशान    से    कभी
शायद यह    दर्द इससे   बताया न जाएगा

✍ ज़ीशान आज़मी

خوشبو    ہے پیار   اس کو چھپایا نہ جائے گا
بن اس   کے    ایک    لمحہ   گزارا نہ جائے گا

قسمیں   نہ    دیجئے   کہ    ملاقات   ہو سکے
ممکن    ہے     ہم  سے وعدہ نبھایا نہ جائے گا

لازم    ہے     زندگی    میں   ترا ساتھ ہر قدم
ہم  سے    قدم     اکیلے     اٹھایا    نہ جائے گا

گزرے گی رات یوں ہی اندھیرے میں بن ترے
تنہا    چراغ     ہم     سے    جلایا نہ  جائے گا

کیسے    بھولا دوں    تم کو تری میٹھی یاد کا
سینے    میں    داغ ہے    کہ  مٹایا  نہ جائے گا

دردِ جدائی    پوچھو     نہ ذیشان    سے کبھی
شاید یہ    درد     اس    سے   بتایا نہ جائے گا

✍ ذیشان آعظمی

Monday, March 11, 2019

Aayiye Dil nichodh kar dekhein

नफ्स  अपना   झिंझोड    कर देखें
राहे हक़   पर भी    दौड़   कर देखें

दिल को आराम मिलता है कि नहीं
हम अना   अपनी    छोड़  कर देखें

दोस्त! आसान   काम है    कि नहीं
टूटी पत्ती   को    जोड़    कर   देखें

ख्वाहिशों   की  हमारी  हद है कोई?
आईये दिल  निचोड़कर   कर  देखें

चुप है    ज़ीशान    मुद्दतों   से चलो
उस की    खामोशी    तोड़कर  देखें

✍ ज़ीशान आज़मी

مصرع : آئیے دل نچوڑ کر دیکھیں
افاعیل: فاعلاتن مفاعلن فعلن

نفس اپنا   جھنجھوڑ  کر  دیکھیں
راہِ حق    پر  بھی دوڑ کر دیکھیں

دل کو   آرام    ملتا   ہے   کے نہیں
ہم   انا    اپنی   چھوڑ  کر دیکھیں

دوست!   آسان   کام   ہے کے نہیں
ٹوٹی    پتی    کو جوڑ کر دیکھیں

خواہشوں کی ہماری حد ہے کوئی؟
آئیے   دل     نچوڑ     کر   دیکھیں

چپ ہے   ذیشان    مدتوں سے چلو
اس  کی  خاموشی توڑ کر دیکھیں

✍ ذیشان آعظمی

Sunday, February 10, 2019

Ek zarra e haqeer hoo mai khaakdaan me

क़ुरआं किताबें हक़ है खुदा   की जाहान में
यह दस्तेयाब    हमको   है अरबी ज़ुबान में

हर काम    हम शुरू    करें   रब के नाम से
फिर कामयाबी तय है हर  एक इम्तिहान में

ऐ बंद ऐ    खुदा तू     परेशां    है क्यों  यहां
रोज़ी लिखी    हुई है    तेरी     आसमान में

मिमबर से हक़   बयान तू करता नही अगर
तो दम    नहीं     है    मौलवी तेरे बयान में

दुनिया   में सबसे अच्छा हमारा ही मुल्क है
हम को    सुकून    मिलता है   हिंदुस्तान में

ख़ालिक़ की कायनात   में औक़ात क्या मेरी
एक ज़र्र ए   हक़ीर    हूं मैं     खाकदान   में

इल्मो    हुनर   दिया   तुझे    परवरदिगार ने
ज़ीशान हम्द पढ़ता जा ख़ालिक़ की शान में

✍ ज़ीशान आज़मी

قرآں   کتابِ حق ہے  خدا کی جہان میں
یہ    دستیاب   ہم کو ہے عربی زبان میں

ہر کام   ہم   شروع کریں رب کے نام سے
پھر کامیابی   طے   ہے ہراک امتحان میں

اے بندئے خدا  تو پریشاں ہے کیوں یہاں
روزی   لکھی   ہوئی ہے تیری آسمان میں

ممبر   سے   حق   بیان   تو کرتا نہیں اگر
تو دم    نہیں   ہے مولوی تیرے بیان میں

دنیا میں سب سے اچھا ہمارا ہی ملک ہے
ہم کو    سکون    ملتا   ہے ہندوستان میں

خالق   کی کائنات   میں اوقات کیا میری
ایک     ذرہ حقیر ہوں    میں خاکدان میں

علم  و ہنر    دیا    تجھے    پروردگار  نے
ذیشان حمد پڑھتا جا خالق کی شان میں

✍ ذیشان آعظمی

Monday, January 28, 2019

Gaddar nahi karte kabhi pyar watan se

ناپید ہو    ظلمت    کا   ہر اک  خار وطن سے
ایسا    کوئی   شائع   کرے   اخبار وطن  سے

اس بات کو سب جان لیں جتنے ہیں صحافی
غدار    نہیں     کرتے   کبھی    پیار وطن سے

नापेद हो ज़ुलमत का हर एक खार वतन से
ऐसा कोई  शाया   करें    अखबार वतन  से

इस बात को  सब जान लें जितने हैं सहाफी
गद्दार    नहीं   करते    कभी   प्यार वतन से

✍ Zeeshan Azmi

Friday, January 25, 2019

Makhlooq har ek shaher ki ghabraane lagi hai

अब ज़ुल्म की खेती   यहां लहराने लगी है
हर सिम्त से रोने    की सदा  आने लगी है
अपना तू    कोई भेज रहबर   मेरे अल्लाह
मखलूक़ हर एक शहर की घबराने लगी है

اب ظلم کی کھیتی یہاں لہرانے لگی ہے
ہر سمت  سے رونے کی صدا آنے لگی ہے
اپنا تو   کوئی  بھیج دے رہبر میرے اللہ
مخلوق ہراک   شہر کی گھبرانے لگی ہے

✍ Zeeshan Azmi