Thursday, November 29, 2018

Ya Rab dua hai daulat e afkaar bakhsh de


बच्चे हमारे    नाम     करें    मुल्के हिंद का
उनके दिलों को इल्म का  अनवार बख्श दे

इल्मो   हुनर से  अपने जो शम्सो क़मर बने
इस मुल्क  के जवां का वो रफतार बक्श दे

जो   काम   करने   वाली   हो हिंदुस्तान में
या रब    हमें तो   ऐसी वो सरकार बख्श दे

मैं इत्तेहाद   चाहता     हूं     मुल्के   हिंद में
या रब दुआ   है दौलते  अफकार   बख्श दे

हर एक को इत्तेहाद का देना है मुझको दर्स
ज़ीशान  को   सलिक़ये    गुफतार बख्श दे

✍ ज़ीशान आज़मी

پروردگار    ہم کو    وہ    کردار بخش دے
باطل کے    آگے    جرآت   انکار بخش دے

گلشن   ہمارے    ملک    کا پھولا پھلا رہے
رونق  اسے    تو ایسی   ضیابار بخش دے

بچے    ہمارے   نام   کریں    ملکِ   ہند کا
ان کے دلوں    کو علم   کا انوار بخش دے

علم و ہنر    سے اپنے جو شمس و قمر بنے
اس ملک کے جواں کو وہ رفتار بخش دے

جو کام   کرنے والی    ہو    ہندوستان میں
یا رب ہمیں  تو ایسی وہ سرکار بخش دے

میں اتحاد    چاہتا     ہو    ملکِ ہند   میں
یا رب    دعا ہے    دولت   افکار بخش دے

ہر اک  کو اتحاد کا دینا ہے مجھ کو  درس
ذیشان    کو   سلیقہ   گفتار   بخش   دیے

✍ ذیشان آعظمی

Friday, November 23, 2018

Midhat e Muhammad saw me lutf e madh e Jafar hai

Zainabi Mumbai ke misre par meri adna kaawish
Wiladat e Mustafa (SAW) Aur Imame Jafar a.s aap sab ko Mubarak ho.

खुशबू ए   रिसालत से   यह    जहां    मुअत्तर है
परतुए नबुवत      से   हर     ज़मां     मुनव्वर है

यह जो  आसमां   पर है माहे   रबि   अव्वल का
हर ज़माने   में राहत   हर     खुशी का मज़हर है

आप की   विलादत    से आसमां   ज़मीं   महके
निकहत ए रिसालत    से   हर  ज़मां   मुनव्वर है

एक दुरुद मिलजुलकर पढ़े अहले  महफिल अब
आने वाला    दुनिया    में    मुस्तफा    पयंबर है

वह अमीं है सादिक़ है और अज़ीम ख़िलक़त भी
नूर ए मुस्तफाइ    से    कुल    जहां    मुनव्वर है

जानशीने      पैगंबर     भी इमामे     सादिक़ भी
आगही का     दरवाजा    भी     इमाम जाफर है

क्या  मैं    इलमो     हिकमत    का उन    के छेडूं
आला दर्जे   पर    मौला    यह    मेरा   मुक़र्रर है

शाने जाफरे    सादिक़ में  यह    कहना काफी है
जितने फिक़्ह   के मुखिया    है हर  एक टीचर है

तुम हमारी    ज़ीनत की     वजह बनना ए शीओ
क़ौल मेरे     मौला    का    सायेबान     बनकर है

रूशनास    करवाया   हमको    जिस शरीयत से
फिक़ह जाफरी   है   वह इल्मे    दिं का महवर है

करने दीजिए    मुझको    सादिक़ैन  की मिदहत
मिदहते मोहम्मद   में   लुत्फे    मदहे    जाफर है

ए खुदा मुझे    भी एक    घर आता   हो जन्नत में
मदह गो यह    ज़ीशां  भी आज एक सुखनवर है

✍ ज़ीशान आज़मी

خوشبوئے    رسالت    سے   یہ جہاں معطر ہے
پرتو    نبوت     سے     ہر     زماں    منور   ہے

یہ    جو   آسماں    پر    ہے  ماہ ربیع الاول کا
ہر   زمانے میں  راحت اور خوشی کا مظہر ہے

آپ   کی   ولادت   سے آسماں    زمیں    مہکے
نکہت    رسالت     سے     ہر     زماں معطر ہے

اک   درود   مل جل کر پڑھیے   اہل محفل اب
آنے والا    دنیا    میں    مصطفی     پیمبر  ہے

وہ امیں  ہیں صادق ہیں اور عظیم خلقت بھی
نورِ  مصطفائی    سے    کل    جہاں  منور   ہے

جانشین   پیغمبر    بھی     امام   صادق   بھی
آگہی     کا      دروازہ    بھی   امام  جعفر  ہے

کیا میں علم و حکمت کا ان کے تزکرہ چھیڑوں
اعلی    درجے      پر  مولا     یہ مرا   مقرر  ہے

شانِ  جعفرِ  صادق    میں   یہ    کہنا  کافی ہے
جتنے   فقہ کے مکھیا  ہیں، ہر اک  کا  ٹیچر  ہے

تم ہماری    زینت    کی   وجہ   بننا  اے شیعو!
قول  میرے       مولا   کا    سائبان   بن  کر ہے

روشناس   کروایا  ہم   کو   جس   شریعت سے
فقہ جعفری   ہے   وہ ، علم   دیں  کا  محور ہے

کرنے دیجئے   مجھ   کو  صادقین کی   مدحت
مدحتِ   محمد  میں     لطف   مدح  جعفر  ہے

اے خدا مجھے بھی اک گھر عطا  ہو جنت میں
مدح گو یہ   ذیشاں  بھی آج ایک   سخنور  ہے

✍ ذیشان آعظمی

Tuesday, November 20, 2018

Madine ke chiraagoN se shanaasaai zaroori hai

इबादत   के    लिए    ईमाने    यकताई    ज़रूरी है
हर एक इंसां  मे इल्मे  दीं    की    गहराई ज़ुरूरी है

नबी के क़ौल पर  चलना   बड़ा  आसान है लेकिन
कभी पाकीज़गी की और दिल की बिनाई ज़ुरूरी है

अगर अख़लाक़   आला चाहिये   तुम को जमाने में
मोहम्मद की   इताअत   करना भी   भाई ज़ुरूरी है

नबी की जिंदगी पढ़ कर वही  तालीम हासिल कर
हर एक इनसां के अंदर  उन की अच्छाई  ज़ुरूरी है

खुदा का क़ुर्ब हासिल   करना है   तो जाग रातों में
इबादत     के    लिए    ऐ  बंन्दे तन्हाई    ज़ुरूरी है

अगर नूरे हिदायत    मुस्तफा  का    चाहिए तुमको
मदीने के    चिरागों     से      शनासाई     ज़ुरुरी है

लबो को खोल दे तू जान की हरगिज़ न कर परवाह
अगर हक़   के    लिए    ज़ीशान    गोयाई ज़ुरुरी है

✍ ज़ीशान आज़मी

عبادت   کے     لئے    ایمانِ یکتائی    ضروری ہے
ہراک انساں میں علمِ دیں کی گہرائی ضروری ہے

نبی    کے      قول      پر   چلنا بڑا آسان ہے لیکن
کبھی    پاکیزگی  اور  دل کی بینائی ضروری ہے

اگر اخلاق    اعلی    چاہئے    تم    کو زمانے میں
محمد کی    اطاعت  کرنا بھی بھائی ضروری ہے

نبی کی   زندگی    پڑھ  کر وہی تعلیم حاصل کر
ہر اک   انساں کے  اندر ان کی اچھائی ضروری ہے

خدا کا قرب حاصل   کرنا  ہے تو جاگ راتوں میں
عبادت   کے   لئے    اے بندے   تنہائی  ضروری ہے

اگر   نورِ ہدایت    مصطفی     کا    چاہئے  تم کو
مدینے     کے    چراغوں  سے شناسائی ضروری ہے

لبوں کو  کھول دے تو جان کی ہرگز نہ کر پرواہ
اگر   حق کے    لئے    ذیشان   گویائی ضروری ہے

✍ ذیشان آعظمی

Sunday, November 18, 2018

Dhoop hai qayamat ki saaibaaN nahi koi

ہے یقیں     محبت کا      یہ گماں  نہیں کوئی
عشق ہی    حقیقت     ہے  داستاں نہیں کوئی

اے صنم    ترا جلوہ     ہے مرے     تخیّل میں
تم ہو دل کی دھڑکن میں اور وہاں نہیں کوئی

عاشقی    میں    انساں کو کب  سکون ملتا ہے
دل کے    لاکھ  دشمن ہیں  مہرباں  نہیں کوئی

تیرے حسن    کے چرچے  ہیں اگر جو دنیا میں
مجھ سا بھی   زمانے میں نو جواں نہیں کوئی

برق    نے    جلا   ڈالا    جو   مرا نشیمن   تھا
زیرِ آسماں    میں    ہوں   ہے مکاں نہیں کوئی

تنہا   یہ    سفر     اپنا     دور ہے     بہت منزل
دھوپ ہے    قیامت    کی    سائباں نہیں کوئی

عاشقی    تو    اے ذیشان     نام ہے  جدائی کا
اپنی     آزمائش     کا     امتحاں    نہیں  کوئی

✍ ذیشان آعظمی

Saturday, November 17, 2018

Mil kar jalaao aag me putla yazeed ka

क्या पूछता    है मुझसे     तू   क़िस्सा  यज़ीद का
फितनागिरी     में हाथ    था      लम्बा यज़ीद का

फतवो     से कर रहा    है जो   गुमराह क़ौम को
बेशक    वही    ज़लील है     नुत्फा    यज़ीद का

फितना    खड़ा करेगा    जो    मिंबर पे   बैठकर
वो  मौलवी    है     चाहने     वाला     यज़ीद का

गुमराह    शायरी     का जो     फानूस   बन गया
उस्ताद वो      कहां    वोह है    चेला  यज़ीद का

जिसको    नहीं    है शायरी    का इम्तियाज़ कुछ
बेशक    वही    ज़लील  है    बच्चा    यज़ीद का

बदबू से    घुटने लगता    था  इंसानियत का दम
गिरता था    जब    जहां भी पसीना   यज़ीद का

किरदार     दाग़दार    था    मलऊन   शख्स का
खुद जान जाओ     कैसा था   शजरा यज़ीद का

हबशि गुलाम    सामने     फिज़्ज़ा के    आ गए
दरबार   में ही हिल     गया    तख्ता   यज़ीद का

देखा जलाल    फिज़्ज़ा    का जैसे   ही वह लईं
बजने लगा    था वैसे      ही बाजा    यज़ीद का

इस कद्र    ज़ुल्मो   जौर     किया   था यज़ीद ने
बैठा     नहीं    था तख़्त     पे बेटा    यज़ीद का

तालीम    अच्छी पाई    थी मोमिन   से इसलिए
ठुकरा     दिया था     बेटे ने तख़्ता    यज़ीद का

क्यों कर सलाम     भेजो ना    मुख्तार को भला
चुन-चुन के    मार डाला    चमचा     यज़ीद का

शैतां के     पैरोकार   थे अजदाद    बद    नसब
कितना    नजिस है    देखिये  शजरा यज़ीद का

वो बदनसीब शख्स था देखिए गुमनाम मर गया
किस को   पता   कहां था   जनाज़ा  यज़ीद का

फरज़नदे फातिमा    की    हुकूमत को देख कर
बेचैन     होगा    कब्र में     मुर्दा       यज़ीद का

गर ईद     तुम  नवी    कि मनाने    को आये हो
मिलकर    जलाओ   आग में पुतला यज़ीद का

बय्यत का     हाथ काट      के   ज़ीशान देखिए
दफना दिया     हुसैन ने    फितना    यज़ीद का

✍ ज़ीशान आज़मी

کیا پوچھتا ہے مجھ سے تو قصہ یزید کا
فتناگری    میں     ہاتھ    تھا لمبا یزید کا

فتووں سے    کر رہا ہے جو گمراہ قوم کو
بے شک    وہی   ذلیل ہے    نطفہ  یزید کا

فتنہ کھڑا کرے    گا  جو منبر پر بیٹھ کر
وہ    مولوی    ہے     چاہنے   والا  یزید کا

گمراہ    شاعری    کا جو   فانوس  بن گیا
استاد وہ   کہاں    وہ    ہے   چیلا یزید کا

جس کو نہیں   ہے شاعری کا  امتیاز کچھ
بے شک   وہی    ذلیل  ہے    بچہ   یزید کا

بدبو سے  گھٹنے  لگتا تھا انسانیت  کا دم
گرتا  تھا جب   جہاں بھی  پسینہ یزید کا

کردار داغدار    تھا  ملعون    شخص   تھا
خود جان    جاؤ کیسا   تھا شجرا یزید کا

حبشی غلام    سامنے     فضہ    کے  آ گئے
دربار میں    ہی    ہل    گیا   تختہ یزید کا

دیکھا جلال   فضہ کا   جیسے ہی وہ لعیں
بجنے    لگا تھا    ویسے    ہی باجا یزید کا

اس   قدر   ظلم و جور   کیا تھا یزید نے
بیٹھا    نہیں    تھا تخت پہ  بیٹا یزید کا

تعلیم اچھی پائی تھی مومن سے اس لئے
ٹھوکرا   دیا   تھا  بیٹے نے تختہ  یزید کا

کیوں کر  سلام بھیجو نہ مختار کو بھلا
چن چن    کے مار  ڈالا تھا چمچا یزید کا

شیطاں کے  پیروکار  تھے اجداد بد نصب
کتنا نجس   ہے    دیکھئے  شجرا یزید کا

وہ بد نصیب    شخص  تھا گمنام مر گیا
کس    کو پتا   کہاں   تھا  جنازہ یزید کا

فرزندِ فاطمہ   کی  حکومت کو دیکھ کر
بے چین    ہوگا    قبر   میں مردہ یزید کا

گر عید    تم نوی   کی   منانے  کو آئے ہو
مل  کر   جلاؤ   آگ    میں    پتلا یزید کا

بیعت    کا ہاتھ  کاٹ کے ذیشان دیکھئے
دفنا     دیا     حسین    نے  فتنہ یزید کا

✍ ذیشان آعظمی