Thursday, April 13, 2017

Mushkil ko door karta hai mushkil kusha Ali

Mushkil ko door karta hai mushkil kusha Ali

Har Manzilon ke raasto'n ka raasata Ali
Har rahnuma se achcha mera rahnuma Ali

Allah ke wali hain, wasiye Rasool bhi
Sab se buland martaba hai aap ka Ali

Deene khuda ki kashti ko koi dubaye kya
Allah ki taraf se hai jab nakhuda Ali

Nazil kahoo to kaise kahoo nuqs hai bada
Hum maante hai kaabe me paida huwa Ali

Nade Ali kaho Nabi, Jibreel ne kaha
Mushkil ko door karta hai mushkil kusha Ali

Dil ko sukoo'n milta hai aur hausala hame
Zeeshan jab zuba'n se nikalta hai Ya Ali

✍ Zeeshan Azmi

Note: 4th sher's dalil:

*आइम्मा (अ) के लिए विलादत के बजाए ज़हूर या नुज़ूल लिखने के नुक़्सानात*
मौला की मुहब्बत में बाज़ लोग इतना आगे बढ़ गए के वो मासूमीन (अ) और उलोमा की सीरत को छोड कर अपनी मरज़ी से आइम्मा (अ) के लिए विलादत के बजाए ज़हूर या नुज़ूल लिखने लगे हैं जबके मासूमीन से जो रिवायतें मासूमीन की विलादत के बारे में किताबों में मिलती हैं उन सब में विलादत ही लिखा है, हमें ये कोई हक़ नहीं पहुंचता के हम इमामे मासूम से भी आगे बढ़ जाऐं हम किसी भी मासूम से न इतनी मुहब्बत कर सकते हैं जितनी एक मासूम दूसरे मासूम से करते थे और न हमें इतनी मारफ़त हो सकती है जितनी एक मासूम को दूसरे मासूम की थी इसके बावजूद भी एक मासूम ने दूसरे मासूम की विलादत के लिए ज़हूर या नुज़ूल का लफ़ज़ इस्तेमाल नहीं किया है।
अगर हम आइम्मा ए मासूम (अ) की विलादत को ज़हूर या नुज़ूल लिखना शूरु करदें तो इस से शीया मज़हब को बहूत सारे नुक़्सानात पंहुच सकते हैं।
वर्षों से वहाबी ये कोशिश कर रहे हैं के इमाम अली (अ) की ख़ाना ए काबा में विलादत की फ़ज़ीलत को कमरंग कर दिया जाए, लेकिन शिया उलोमा ने ऐसा होने नहीं दिया, मगर नुज़ूल या ज़हूर लिखने वाले़ वहाबियों की इस कोशिश को पानी दे रहें है और विलादत के बजाए ज़हूर या नुज़ूल लिख कर नादानिस्ता, वहाबियों को फ़ायदा पंहुचा रहे हैं, क्योंकि ज़ुहूर या नुज़ूल रायज होने से इमाम अली (अ) की मौलूदे काबा होने की फ़ज़ीलत ख़त्म हो जाएगी।
जब विलादत का इंकार कर दिया तो शहादत का भी इंकार होगा तो मक़ामाते मुक़द्देसा नजफ़, करबला, क़ुम, मशहद वग़ैरा की ज़ियारत और इजतमा की कोई अहमियत नहीं रहेगी और फिर ये सवाल भी होगा के जब कोई शहीद हुआ ही नहीं तो फिर इन ज़ियारतगाहों में कौन दफ़न है।?
ज़हूर या नुज़ूल कहने या लिखने के क़ायल अफराद को ज़ियारते वारेसा का इंकार करना पडेगा क्योंकि ज़ियारते वारेसा में मासूम (अ) फ़रामते हैं के: मैं गवाही देता हूँ के आप बुलंद तरीन सुल्बों और पाकीज़ा तरीन रहमों में नूरे इलाही बन कर रहे, और ये बात सब जानते हैं के सुल्ब और रहम का ताअल्लुक़ विलादत से होता है।
मासूम से मरवी रजब की दुआ कर इंकार करना पडेगा जिस में मासूम फ़रमाते हैं के: ऐ माबूद ! माहे रजब में मुतावल्लिद होने वाले 2 मौलूदों के वास्ते से सवाल करता हूँ जो इमाम मुहम्मद तक़ी (अ) और इमाम अली नक़ी (अ) बुलंद नसब वाले हैं, इन दोनों के वास्ते से तेरा बेहतरनी तक़र्रुब चाहता हूँ।
जब विलादत का इंकार किया जाएगा तो शहादत का इंकार भी करना पडेगा और जब शहादत का इंकार किया जाएगा तो मान्ना पड़ेगा के इमाम को शहीद करने वाला भी कोई नहीं था, लेहाज़ा ज़ालेमीन के ज़िम्मे आइम्मा का कोई ख़ून नहीं रहेगा।
वो तमाम दुआऐं और ज़ियारतें जो अक़ायद और मुआरिफ़ से भरी हुई हैं और जिन में ज़ालेमीन पर लआन ज़िक्र हुई है उनका इंकार कर दिया जाएगा, इस लिए के जब किसी ने शहीद ही नहीं किया तो लआन वो तआन क्यों ?
जब आइम्मा पैदा ही नहीं होते तो नस्ले सादात कहाँ से वजूद में आ गई ? क्या तमाम सादात का भी ज़हूर हो गया है ? इस अक़ीदे वाले को नस्ले सादात का इंकार करना पडेगा।
मासूम की विलादत का इंकार करने वालों को ईदे मीलादुन्नबी (स) का इंकार करना पड़ेगा और वहाबी यही चाहते हैं, क्योंकि तमाम मुसलमान नबी (स) की विलादत का जश्न मनाते हैं और आपके रोज़े विलादत को किसी ने भी ज़हूर या नुज़ूल से याद नहीं किया है।
ऐसा अक़ीदा रखने वालों को इमाम अली (अ) की एक ऐसी फ़ज़ीलत का इंकार करना पडेगा जिस में कोई दूसरा शरीक नहीं है और वो ‘‘ मौलूदे काबा ‘‘ होना है, अलबत्ता वहाबी इसका भी इंकार करते हैं।
जनाबे फ़ातेमा ज़हरा (अ) और दीगर आइम्मा ए मासूमन (अ) की इस फ़ज़ीलत के बारे में मरवी उन रिवायतों का इंकार करना पडेगा जिन में इन मासूमीन (अ) को शिकमे मादर में अपनी वालेदा से बातें करते हुए बताया गया है।
विलादत के बजाए ज़हूर इस्तेमाल होने लगे तो सब से बड़ा नुक़्सान ये होगा के लोगों के ज़हन में इमामे ज़माना (अ) के ज़हूर की जो ख़ुसूसियत है वो ख़त्म हो जाएगी।
(तालिबे दुआः पैग़ंबर नौगांवी)

No comments:

Post a Comment

Your comments are appreciated and helpful. Please give your feedback in brief.