Friday, August 4, 2017

आंखें बिछाए राह पर उसकी खड़ा रहा

दिल और दिमाग मेरा यही सोचता रहा
कहनी न थी जो बात वही बोलता रहा

देखे बिना पलट के, मेरी जां चली गई
आंखें बिछाए राह पर उसकी खड़ा रहा

हिजरत पर उसकी, दिल पे असर जाने क्या हुआ
हर वक्त क़ल्ब पर मेरे महशर बपा रहा

वह ग़ैर मुल्क जाके बसे हैं अजी़ब है
क़िस्मत के आईने को मैं बस ताकता रहा

वादे को तूने तोड़ा है तू ही बता मुझे
तू बावफा रही कि मैं बावफा रहा

जिसके सबब वह गुफ्तगु करना ही छोड़ दे
ज़ीशान रात दिन वह खता ढूंढता रहा

✍ ज़ीशान आज़मी

دل اور دماغ میرا یہی سوچتا رہا
کہنی نہ تھی جو بات وہی بولتا رہا

دیکھے بنا پلٹ کے مری جاں چلی گئی
آنکھیں بچھائے راہ پہ اس کی کھڑا رہا

ہجرت پہ اس کی، دل پہ اثر جانے کیا ہوا
ہر وقت قلب پر مرے محشر بپا رہا

وہ غیر ملک جا کے بسے ہیں عجیب ہے
قسمت کے آئینے کو میں بس تاکتا رہا

وعدہ کو تو نے توڑا ہے تو ہی بتا مجھے
تو با وفا رہی کہ میں با وفا رہا

جس کے سبب وہ گفتگو کرنا ہی چھوڑ دے
ذیشان رات دن وہ خطا ڈھونڈتا رہا

✍ ذیشان آعظمی