Saturday, August 12, 2017

ज़ीशान किस लिए तू ऊंचाई चाहता है

टूटा हुआ दिल है गोयाई चाहता है
कहने को हाले दिल वह हरजाई चाहता है।

क्या दास्ताने इश्को उल्फत सुनाऊं तुमको
यह दिल समंदर की गहराई चाहता है।

लिख दूंगा मैं सवानेह उमरी उसकी लेकिन
मेरा यह नफ्स पूरी तन्हाई चाहता है।

मुझ पर सितम किया है कितना ही दिलरुबा ने
फिर भी दिल है उसकी अच्छाई चाहता है।

गिरते हुए बहुत से लोगों को देखा हमने
ज़ीशान किस लिए तू ऊंचाई चाहता है

✍ ज़ीशान आज़मी

ٹوٹا ہوا یہ دل ہے گویائی چاہتا ہے
کہنے کو حالِ دل وہ ہرجائی چاہتا ہے

کیا داستانِ عشق و الفت سناؤں تم کو
یہ دل سمندروں کی گہرائی چاہتا ہے

لکھ دونگا میں سوانح عمری اسی کی لیکن
میرا یہ نفس پوری تنہائی چاہتا ہے

مجھ پر ستم کیا ہے کتنا ہی دلربا نے
پھر بھی یہ دل ہے اس کی اچھائی چاہتا ہے

گرتے ہوئے بہت سے لوگوں کو دیکھاہم نے
ذیشان کس لئے تو اونچائی چاہتا ہے

✍ ذیشان آعظمی

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