Thursday, August 17, 2017

शायद हमें मिल जाए खुदा रात गए तक

Mauj e Ghazal online Mushaira
मौजे ग़जल ऑनलाइन मुशायरा पर मेरी अदना काविश:

आपस में एक तूफान उठा रात गए तक
वह साथ हमारे थे खफा रात गए तक

कहते रहे हम प्यार मोहब्बत की कहानी
दिल उनका मगर जलता रहा रात गए तक

आंखों में नमी दर्दे जिगर सोने न देगा
यूं प्यार में मिलती है सज़ा रात गए तक

बर्बाद ना कर हुस्न पर तू अपनी जवानी
सोने नहीं दे उनकी अदा रात गए तक

कुरआं की तिलावत भी, नमाजे भी पड़ेंगे
शायद हमें मिल जाए खुदा रात गए तक

इंसानों की रूहे भी तडप जाए जो पढ़कर
ज़ीशान ने वह हाल लिखा रात गए तक

✍ ज़ीशान आज़मी

آپس میں اک طوفان اٹھا رات گئے تک
وہ ساتھ ہمارے تھے خفا رات گئے تک

کہتے رہے ہم پیار محبت کی کہانی
دل ان کا مگر جلتا رہا رات گئے تک

آنکھوں میں نمی، دردِ جگر سونے نہ دےگا
یوں پیار میں ملتی ہے سزا رات گئے تک

برباد نہ کر حسن پہ تو اپنی جوانی
سونے نہیں دے ان کی ادا رات گئے تک

قرآں کی تلاوت بھی، نمازیں بھی پڑھیں گے
شاید ہمیں مل جائے خدا رات گئے تک

انسانوں کی روحیں بھی تڑپ جائیں جو پڑھ کر
ذیشان نے وہ حال لکھا رات گئے تک

✍ ذیشان آعظمی

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