Sunday, August 27, 2017

थम गया दर्द उजाला हुआ तन्हाई में

वह सज़ा हम को मिली इश्क़ की रुसवाई में
थम गया दर्द उजाला हुआ तन्हाई में

आसमां झुकता है तेरी ही ज़ियारत के लिए
हमने देखी वह कशिश आप की अंगड़ाई में

अब तो वाकि़फ हैं मेरे हाल से दुनिया वाले
राज़े दिल आम हुआ इश्क़ की सच्चाई में

खूब वाक़िफ हूं हसीनों की अदाओं से मगर
फंसता जाता हूँ हसीनाओं की ज़ेबाई में

शिर्क से बचते हुए करता हूं तारीफ तेरी
इतनी तौफीक़ कहां कोई भी शैदाई में

कोशिशे लाख करो उस पे मगर याद रहे
धोखा ज़ीशान नहीं खाता पज़ीराई में

✍ ज़ीशान आज़मी

وہ جزا ہم کو ملی عشق کی رسوائی میں
تھم گیا درد اجالا ہوا تنہائی میں

آسماں جھکتا یے تیری ہی زیارت کے لئے
ہم نے دیکھی وہ کششِ آپ کی انگڑائی میں

اب تو واقف ہے مرے حال سے دنیا والے
رازِ دل عام ہوا عشق کی سچائی میں

خوب واقف ہوں حسینوں کی اداؤں سے مگر
پھنستا جاتا ہوں حسیناو کی زیبائی میں

شرک سے بچتے ہوئے کرتا ہوں تعریف تیری
اتنی توفیق کہاں کوئی بھی شیدائی میں

کوششیں لاکھ کرو اس پہ مگر یاد رہے
دھوکا ذیشان نہیں کھاتا پزیرائی میں

✍ ذیشان آعظمی

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