Sunday, August 20, 2017

अपनी यादों का सरोसामां जलाते जाइए।

जाने से पहले ज़रा हम को हंसाते जाइए
बात कोई मीठी सी हम को सुनाते जाइए।

चेहरा है ग़मगीन मेरा, मैं हूं मुरझाया हुआ
आपको ग़म किस बात का? चेहरा खिलाते जाईए।

मैं नहीं हूं ग़ैर कोई, यह घड़ी फुरक़त की है
मेरे हाथों से भी हाथ अपना मिलाते जाइए।

कुछ क़रार आया था दिल को आप के आने के क़ब्ल
दर्द दिल का आप मेरा और बढ़ाते जाईए।

आप की सौगात है कुछ, मैं जला सकता नहीं
अपनी यादों का सरोसामां जलाते जाइए।

बेरुखी ज़ीशान से अच्छी नहीं है दिलरुबा
दिल संभाले बैठा है उस को मनाते जाइए।

✍ ज़ीशान आज़मी

جانے سے پہلے ذرا ہم کو ہنساتے جائیے
بات کوئی میٹھی سی ہم کو ستاتے جائیے

چہرا ہے غمگین میرا، میں ہوں مرجھایا ہوا
آپ کو غم کس بات کا؟ چہرا کھلاتے جائیے

میں نہیں ہوں غیر کوئی، یہ گھڑی فرقت کی ہے
میرے ہاتھوں سے بھی ہاتھ اپنا ملاتے جائیے

کچھ قرار آیا تھا دل کو آپ کے آنے کے قبل
درد دل کا آپ میرا اور بڑھاتے جائیے

آپ کی سوغات ہے کچھ، ہم جلا سکتے نہیں
اپنی یادوں کا سروساماں جلاتے جائیے

بے رخی ذیشان سے اچھی نہیں ہے دلربا
  دل سنبھالے بیٹھا ہے اس کو مناتے جائیے

✍ ذیشان آعظمی

✍ Zeeshan Azmi(Mumbai)
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