Wednesday, August 9, 2017

जहां चाहे तू जा मेरी बला से

तवक्को क्या मुझे उस बेवफा से
मेरा दिल जिस ने तोड़ा है दगा़ से

मैं हूं एक दिलजला यारों मुझे है
बड़े शिकवे शिकायत दिलरुबा से

ऐ परदेसी मुझे क्या लेना देना
जहां चाहे तू जा मेरी बला से

दग़ाबाजी कि तेरी  ऱोज़े महशर
शिकायत मैं करूंगा बस खुदा से

वफा की बात ना कर मुझसे हरदम
मैं आ़जिज़ हो गया तेरी वफा से

ज़मीनों आसमां देंगे गवाही
ख़फा ज़ीशान है सर्कश पिया से

✍ ज़ीशान आज़मी

توقع کیا مجھے اُس بے وفا سے
میرا دل جس نے توڑا ہے دغا سے

میں ہوں اک دل جلا یارو مجھے ہیں
بڑے شکوے شکایت دل ربا سے

اے پردیسی مجھے کیا لینا دینا
جہاں چاہے تو جا میری بلا سے

دغابازی کی تیری روزِ محشر
شکایت میں کرونگا بس خدا سے

وفا کی بات نہ کر مجھ سے ہر دم
میں عاجز ہو گیا تیری وفا سے

زمین و آسماں دینگے گواہی
خفا ذیشان ہے سرکش پیا سے

✍ ذیشان آعظمی

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