Sunday, August 27, 2017

क्यों आज तक मै दूर रहा अपने आप से

करता हूं रात दिन मैं दुआ अपने आप से
हरगिज़ न होने पाऊं जुदा अपने आप से।

एहसास उसके झूठ का जब सर पे चढ़ गया
ना जाने क्या मैं कहता रहा अपने आप से।

जब देखी बेवफाई की तस्वीर सामने
पहचाना खुद को, प्यार हुआ अपने आप से।

दिल तोड़कर मेरा वह कहां पायेंगी सुकूं
होंगी जरूर वह भी खफा अपने आप से।

जाते हैं छोड़कर हमें तो जाने दीजिए
हमने भी उनको दूर रखा अपने आप से।

आंखें खुली तो जान गया राज़े जिंदगी
क्यों आज तक मै दूर रहा अपने आप से

ज़ीशान इश्क़ करना कोई खेल तो नहीं
मिलती है आशिकों को सजा अपने आप से।

✍ ज़ीशान आज़मी

کرتا ہوں رات دن میں دعا اپنے آپ سے
ہرگز نہ ہونے پاؤں جدا اپنے آپ سے

احساس اسکے جھوٹ کا جب سر پہ چڑھ گیا
نا جانے کیا میں کہتا رہا اپنے آپ سے

جب دیکھی بے وفائی کی تصویر سامنے
پہچانا خود کو، پیار ہوا اپنے آپ سے

دل توڑ کر مرا وہ کہاں پائیں گے سکوں
ہوں گے ضرور وہ بھی خفا اپنے آپ سے

جاتے ہیں چھوڑ کر ہمیں تو جانے دیجئے
ہم نے بھی ان کو دور رکھا اپنے آپ سے

آنکھیں کھولیں تو جان گیا رازِ زندگی
کیوں آج تک میں دور رہا اپنے آپ سے

ذیشان عشق کرنا کوئی کھیل تو نہیں
ملتی ہے عاشقوں کو سزا اپنے آپ سے

✍ ذیشان آعظمی

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