Sunday, August 20, 2017

वस्ल से इन्तज़ार अच्छा था

क्या मेरा प्यार एक तरफा था
या न इक़दाम मेरा पहला था।

उस को मुझ से प्यार था बेशक
बस मेरा ही क़यास झूठा था।

याद है मुझ को दोस्त का मिलना
वह मेरी थी कभी मैं उस का था।

उस की क़िस्मत में प्यारा सा घर था
मेरी क़िस्मत मे दर्ज सहरा था।

वह मिले और हुये नाराज़ भी
वस्ल से इन्तज़ार अच्छा था

फिक्र उस के बिछड़ने की क्यों है
कल भी ज़ीशान तू अकेला था।

✍ ज़ीशान आज़मी

کیا میرا پیار ایک طرفہ تھا
یا نہ اقدام میرا پہلا تھا

اس کو مجھ سے پیار تھا بےشک
بس مرا ہی قیاس جھوٹا تھا

یاد ہے مجھ کو دوست کا ملنا
وہ میری تھی کبھی میں اسکا تھا

اس کی قسمت میں پیارا سا گھر تھا
میری قسمت میں درج صحرا تھا

وہ ملے اور ہوئے ناراض بھی
وصل سے انتظار اچھا تھا

فکر اس کے بچھڑنے کی کیوں ہے
کل بھی ذیشان تو اکیلا تھا

✍ ذیشان آعظمی

✍ Zeeshan Azmi(Mumbai)
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