Wednesday, September 20, 2017

फलक पर चांद नमूदार है मोहर्रम का

फलक पर चांद नमूदार है मोहर्रम का
ज़मी पर शोर है बरपा हुसैन के ग़म का

कटा के हाथों को अब्बास ने किया ऊंचा
यह क़ल्ब क्यों न करें एहतराम परचम का

यज़ीद क़त्ल न कर तीन दिन के प्यासे को
हुसैन लख्ते जिगर है रसूल ए आज़म का

खुदा की राह में सरवर ने शहादत दी
रखेगा याद वो हर फर्द नस्ले आदम का

उभरता यूं ही नहीं दाग़ बेसबब कोई
निशा है चांद के सीने पे शह के मातम का

दिलों पर जिन्नो बशर के लिखा है यह फिक़रा
हुसैन हादी है ज़ीशान सारे आलम का

✍ ज़ीशान आज़मी

فلک پہ چاند نمودار ہے محرم کا
زمیں پہ شور ہے برپا حسین کے غم کا

کٹا کے ہاتھوں کو عبّاس نے کیا اونچا
یہ قلب کیوں نہ کرے احترام پرچم کا

یزید قتل نہ کر تین دن کے پیاسے کو
حسین لختِ جگر ہے رسولِ اعظم کا

خدا کی راہ میں سرور نے جو شہادت دی
رکھےگا یاد وہ ہر فرد نسلِ آدم کا

اُبھرتا یوں ہی نہیں داغ بے سبب کوئی
نشاں ہے چاند کے سینے پہ شہ کے ماتم کا

دلوں پہ جنّ و بشر کے لکھا ہے یہ فقرہ
حسین ہادی ہے ذیشان سارے عالم کا

✍ ذیشان آعظمی

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