Thursday, September 7, 2017

हम मुसलमान है, मखमूर नहीं है कोई

बंदा अल्लाह का मजबूर नहीं है कोई
सल्तनत के नशे में चूर नहीं है कोई

मसलेहत ने रोका है राहों पर चलना वरना
अपनी मंजिल से यहां दूर नहीं है कोई

हुक्म क्यों माने भला जालिमों का वह जबरन
हाकिमे बर्मा का मज़दूर नहीं है कोई

चुप नहीं बैठेंगे हम जु़ल्मों सितम के बाइस
हम मुसलमान है, मखमूर नहीं है कोई

देखता है जो हिक़ारत की नज़र से सबको
रखता है आंखें मगर नूर नहीं है कोई

रब की पाने को रज़ा बस यह उठाता है क़लम
यूं तो जीशान भी मशहूर नहीं है कोई

✍ ज़ीशान आज़मी

بندہ اللہ کا مجبور نہیں ہے کوئی
سلطنت کے نشے میں چور نہیں ہے کوئی

مصلحت نے روکا ہے راہوں پہ چلنا ورنہ
اپنی منزل سے یہاں دور نہیں ہے کوئی

حکم کیوں مانے بھلا ظالموں کا وہ جبراً
حاکمِ برما کا مزدور نہیں ہے کوئی

چپ نہیں بیٹھیں گے ہم ظلم و ستم کے باعث
ہم مسلمان ہیں مخمور نہیں ہے کوئی

دیکھتا ہے جو حقارت کی نظر سے سب کو
رکھتا ہیں آنکھیں مگر نور نہیں ہے کوئی

رب کی پانے کو رضا بس یہ اٹھاتا ہے قلم
یوں تو ذیشان بھی مشہور نہیں ہے کوئی

✍ ذیشان آعظمی

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