Monday, September 4, 2017

क्यों कहता हूं यह जानिए मुल्ला हुआ बकरा

Zameer farosh Moulvi numa jahil:

क्यों कहता हूं यह जानिए मुल्ला हुआ बकरा
मक्कार है दुश्मन का यह पाला हुआ बकरा

यह बेचकर इमान अमीरों की गली मे
दर दर फिरा करता है भटका हुआ बकरा

आसान नहीं लोगों को तक़रीर सुनाना
एक तख्त से उतरा यह कहता हुवा बकरा

चिल्लाता है मेंबर पे बहुत ज़ोर से भाई
मुल्ला है कि मंडी से खरीदा हुआ बकरा

पड़ता है खुदा जाने यह क्या बर सरे मेंबर
लगता है मुझे मौलवी उलझा हुआ बकरा

आयते कुरान की पड़ता है अधूरी
मेंबर पे बड़ी शान से बैठा हुआ बकरा

अब छोड़ यह मुल्ला कि बहस ईद का दिन है
इस मुल्ला से बहतर है खरीदा हुआ बकरा

ताजिर की खुलेआम यह निय्यत का असर है
जब ईद क़रीब आई तो महंगा हुआ बकरा

इज़्ज़त करो इस की इसे नहलाओं सजाओ
ईमान से कुर्बानी पे लाया हुआ बकरा

ज़ीशान जो महशर में है जन्नत की सवारी
वह तेरा है कुर्बानी का कटता हुआ बकरा

✍ ज़ीशान आज़मी

کیوں کہتا ہوں یہ جانئے ملا ہوا بکرا
مکار ہے دشمن کا یہ پالا ہوا بکرا

یہ بیچ کر ایمان امیروں کی گلی میں
در در یہ پھرا کرتا ہے بھٹکا ہوا بکرا

آسان نہیں لوگوں کو تقریر سنانا
اک تخت سے اترا یہی کہتا ہوا بکرا

چِلّاتا ہے ممبر پہ بہت زور سے بھائی
مُلّا ہے کہ منڈی سے خریدا ہوا بکرا

پڑھتا ہے خدا جانے یہ کیا بر سرِ ممبر
لگتا ہے مجھے مولوی الجھا ہوا بکرا

یہ آیتیں قرآن کی پڑھتا ہے ادھوری
ممبر پہ بڑی شان سے بیٹھا ہوا بکرا

اب چھوڑ یہ مُلّا کی بحث عید کا دن ہے
اس مُلّا سے بہتر ہے خریدا ہوا بکرا

تاجر کی کُھلے عام یہ نیت کا اثر ہے
جب عید قریب آئی تو مہنگا ہوا بکرا

عزت کرو اس کی اسے نہلاؤ سجاؤ
ایمان سے قربانی پہ لایا ہوا بکرا

ذیشان جو محشر میں ہے جنت کی سواری
وہ تیرا ہے قربانی کا کٹتا ہوا بکرا

✍ ذیشان آعظمی

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