Saturday, September 16, 2017

मुस्लिम के लाडलो पे क़यामत गुज़र गई

बच्चों की मेरे दिल में शहादत उतर गई
मुस्लिम के लाडलो पे क़यामत गुज़र गई

हमदर्द एक मिला नहीं बाज़ारे कूफा में
तिफलाने सफिरे कर्बला की जब नज़र गई

आखिर ख़तायें क्या थी जा़लिम बताओ क्यों
बच्चों की क़ैद खाने में शामो सहर गई

पकड़े गये मोहम्मदो इब्राहिम तो लगा
जीने की भाइयों की हर एक आस मर गई

ज़ीशान क्या रक़म हो वह बच्चों का मरसिया
हर सोच और फिक्र यहां पर ठहर गई

✍ ज़ीशान आज़मी

بچوں کی میرے دل میں شہادت اتر گئی
مسلم کے لاڈلوں پہ قیامت گزر گئی

ہمدرد اک ملا نہیں بازارِ کوفہ میں
طفلانِ صفیرِ کربلا کی جب نظر گئی

آخر خطائیں کیا تھی اے ظالم بتاؤ کیوں
بچوں کی قید خانے میں شام و صحر گئی

پکڑے گئے محمد و ابراہیم تو لگا
جینے کی بھائیوں کی ہراک آس مر گئی

ذیشان کیا رقم ہو وہ بچوں کا مرسیہ
ہر سوچ اور فکر یہاں پر ٹھہر گئی

✍ ذیشان آعظمی

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