Monday, October 23, 2017

Haif uske na kaan tak pahunchi

बहस थी आन बान तक पहुंची
हद हुई पार, जान तक पहुंची

क़त्ल करता है भाई भाई को
यह ख़बर आसमान तक पहुंची

दुश्मनों ने लगाई चिंगारी
आग मेरे मकान तक पहुंची

आज सद हैफ कौ़म की दौलत
मौलवी की दुकान तक पहुंची

ज़ाकिरे बद ख़याल की तक़रीर
लोगों के दरमियान तक पहुंची

इस जहालत के दौर में मिलत
एक यक़ी से गुमान तक पहुंची

मेरी यकता परसती की बातें
हैफ उसके ना कान तक पहुंची

कह दे ज़ीशान हक़, अगर तेरी
बात दिल की जुबान तक पहुंची

✍ ज़ीशान आज़मी

دیا طرحی مشاعرہ

بحث تھی آن بان تک پہنچی
حد ہوئی پار، جان تک پہنچی

قتل کرتا ہے بھائی بھائی کو
یہ خبر آسمان تک پہنچی

دشمنوں نے لگائی چنگاری
آگ میرے مکان تک پہنچی

آج صد حیف قوم کی دولت
مولوی کی دکان تک پہنچی

ذاکرِ بد خیال کی تقریر
لوگو کے درمیان تک پہنچی

اس جہالت کے دور میں ملّت
اک یقیں سے گمان تک پہنچی

میری یکتا پرستی کی باتیں
حیف اس کے نہ کان تک پہنچی

کہ دے ذیشان حق اگر تیری
بات دل کی زبان تک پہنچی

✍ ذیشان آعظمی

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