Tuesday, October 10, 2017

Mera dushman mera ghankhwaar nahi ho sakta

Mera dushman mera ghankhwaar nahi ho sakta

दिल में उल्फत हो तो इंकार नहीं हो सकता
नफरतों का कभी इज़हार नहीं हो सकता

अपनी ताकत का लगा जोर सनम पर  जितना
ज़ल्म हो सकता मगर प्यार नहीं हो सकता

जिसकी बीवी का न अख़लाक़ कभी अच्छा हो
उसका गुलशन कभी गुलजार नहीं हो सकता

अपनी उम्मत से कहा ज़िद ना करो, मूसा ने
मेरे अल्लाह का दीदार नहीं हो सकता

शेर अल्लाह का दुनिया में फक़त एक ही है
दूसरा है हैदरे क़र्रार नहीं हो सकता

मैंने क़ुरआन की तफ़्सीर पढ़ा तो जाना
मेरा दुश्मन मेरा गम खार नहीं हो सकता

मैंने ज़ीशान पढ़ा है यह अली का जुमला
दुश्मने यार कभी यार नहीं हो सकता

✍ ज़ीशान आज़मी

دل میں الفت ہو تو انکار نہیں ہو سکتا
نفرتوں کا کبھی اظہار نہیں ہو سکتا

اپنی طاقت کا لگا زور صنم پر جتنا
ظلم ہو سکتا مگر پیار نہیں ہو سکتا

جس کی بیوی کا نہ اخلاق کبھی اچھاں ہو
اس کا گلشن کبھی گلزار نہیں ہو سکتا

اپنی امت سے کہا ضد نہ کرو موسی نے
میرے اللہ کا دیدار نہیں ہو سکتا

شیر اللہ کا دنیا میں فقط اک ہی ہے
دوسرا حیدر کرّار نہیں ہو سکتا

میں نے قرآن کی تفسیر پڑھا تو جانا
میرا دشمن مرا غم خوار نہیں ہو سکتا

میں نے ذیشان پڑھا ہے یہ علی کا جملہ
دشمنِ یار کبھی یار نہیں ہو سکتا

✍ ذیشان آعظمی

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