Wednesday, November 1, 2017

Mohabbat ki duniya me mashoor kar dooN

मैं नफरत के सब आईने चूर कर दूं
फ़िज़ा को मोहब्बत से मामूर कर दुं

अगर मुझको तौफिक़े खालिक मिले तो
जहालत मैं जाहिल की सब दूर कर दूं

कहां जब्र यकता परस्ती में कोई
किसी शख्स को क्यों मैं मजबूर कर दूं

खुदा ने रखा नफ्स को मेरे बस में
मैं चाहूं इबादत पर मामूर कर दुं

ज़मानत है क्या दोस्ती की? मुनाफिक़!
अगर दावते सुल्ह मंजूर कर दूं

तेरी बेवफाई नहीं चाहता मैं
मोहब्बत की दुनिया में मशहूर कर दूं

यह मुमकिन है ज़ीशान अपने ही घर को
मैं कुरान पढ़ पढ़ के पुरनूर कर दूं

✍ ज़ीशान आज़मी

فیس بک ٹائمز طرحی مشاعرہ

میں نفرت کے سب آئینے چور کردوں
فضا کو محبت سے معمور کردوں

اگر مجھ کو توفیقِ خالق ملے تو
جہالت میں جاہل کی سب دور کردوں

کہاں جبر یکتا پرستی میں کوئی
کسی شخص کو کیوں میں مجبور کردوں

خدا نے رکھا نفس کو مرے بس میں
میں چاہوں عبادت پہ مامور کردوں

ضمانت ہے کیا دوستی کی؟ منافق!
اگر دعوتِ صلح منظور کردوں

تری بے وفائی نہیں چاہتا میں
محبت کی دنیا میں مشہور کردوں

یہ ممکن ہے ذیشان اپنے ہی گھر کو
میں قرآن پڑھ پڑھ کے پر نور کردوں

✍ ذیشان آعظمی

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