Tuesday, November 14, 2017

Waqt duniya ka guzarta hai badi raftaar se

अब क़यामत पास है तौबा तो कर   ग़फ्फार  से
वक्त   दुनिया का       गुज़रता है बड़ी रफ्तार से

सब      फना हो जाएगा ज़ाते खुदा के मा सिवा
बच सका ना आज तक कोई अज़ल की मार से

दिल का दौरा अब जवानों को बहुत आने  लगा
छोड़ के औलाद वालीद        जाते हैं संसार  से

नफरतों से कुछ नहीं हासिल हुआ करता  कभी
यह ज़माना झुकता है इसको झुकाओ प्यार  से

मौलवी का पेशा     है मिम्बर पर पढ़ने के  लिए
दास्ताने  इश्क़ हासिल        करते हैं बाज़ार  से

बा खुदा उन          का हर    अमल    बेकार  है
मैं तो आजिज़ हो गया मुल्लाओं के किरदार  से

✍ ज़ीशान आज़मी

بزم سخنوراں ٩٣ ویں ہفتہ واری فی البدیہہ
طرحی مشاعرہ میں میری یکجا کاوش :

اب  قیامت  پاس ہے   توبہ    تو کر غفار سے
وقت   دنیا   کا   گزرتا    ہے   بڑی  رفتار سے

سب فنا   ہو    جائگا  ذاتِ خدا   کے  ما سوا
بچ سکا نہ آج  تک   کوئی   اجل کی مار سے

دل کا دورہ اب    جوانوں  کو   بہت آنے لگا
جھوڑ کے   اولاد   والد جاتے ہیں سنسار سے

نفرتوں سے کچھ نہیں حاصل ہوا کرتا کبھی
یہ زمانہ  جھکتا ہے اس کو جھکائو پیار سے

مولوی  کا  پیشہ  ہے  ممبر  پہ  پڑھنے کے لئے
داستان  عشق  حاصل  کرتے  ہیں  بازار  سے

با  خدا  ذیشان   ان  کا   ہر عمل   بیکار   ہے
میں تو   عاجز ہو   گیا ملّا ؤں کے کردار سے

✍ ذیشان آعظمی

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