Friday, December 15, 2017

Ba har unwaan, muhabbat ko bahare zindagi kahye

ख़ता से बचते हो जिस   दिन उसे रोज़े खुशी कहये
खुदा के रास्ते    पर चलने वाले    को   ज़की कहये

अगर है   जिंदगी   खुदगर्ज़ तो   है मौत से   बदतर
फिदा हो   दूसरों पर जिंदगी    तो   जिंदगी   कहये

बुराई  सबके अंदर   है ख़ता    से कौन    बच पाया
सहे जो   दोस्त का   हर ऐब   उसको  दोस्ती कहये

खुदा के ख़ौफ से जो शक्स डरता है हर एक लम्हा
तो ऐसी   जिंदगी   को   आप   बेशक बंदगी कहये

सुकूने क़ल्ब    देती      है    हमें   राहे मोहब्बत की
ब हर उनवां,    मोहब्बत को    बहारे जिंदगी कहये

ख़ुदा के नूर से    ज़ुल्म का     साया     दूर होता है
हदायत रब की  जानिब से  मिले  तो रोशनी कहये

खुदा के फज़्ल से ज़ीशान बिल्कुल   ख़ैरियत से है
आली जनाब!  कैसी  है  तबीयत   आप की कहये

✍ ज़ीशान आज़मी

225 ویں دیا عالمی آن لائن فی البدیہہ طرحی
مشاعرہ میں میری کاوش:

خطا سے بچتے ہو جس دن اسے روزِ خوشی کہئے
خدا    کے راستے     پر چلنے     والے کو زکی کہئے

اگر ہے زندگی    خود غرض    تو ہے موت سے بدتر
فدا ہو  دوسروں     پر زندگی    تو  زندگی    کہئے

برائی سب    کے    اندر ہے   خطا سے کون بچ پایا
سہے جو دوست کا ہر   عیب اس کو دوستی کہئے

خدا کے خوف  سے جو شخص ڈرتا ہے ہراک لمحہ
تو ایسی  زندگی     کو    آپ  بے شک بندگی کہئے

سکونِ قلب   دیتی     ہے    ہمیں    راہِ محبت کی
بہ  ہر عنواں    محبت    کو    بہار    زندگی  کہئے

خدا کے   نور سے   ظلمت کا   سایا   دور   ہوتا ہے
ہدایت رب   کی جانب   سے  ملے تو روشنی کہئے

خدا کے   فضل سے   ذیشان  بلکل خیریت سے ہے
جنابِ عالی    کیسی    ہے    طبیعت  آپ کی کہئے

✍ ذیشان آعظمی

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