Wednesday, December 13, 2017

Dastar jinhe di hai unhe sar bhi ataa kar

अल्लाह तू लोगों   को मुसीबत   से रिहा कर
खामोश तमाशाई    को    गोयाई   अता कर

शाहिद हूं मैं कितनी    गई   मासूम की जानें
मज़लूम को पुरसा   दें सभी शमा  जला कर

बैठें हैं बिना   धड़ के   यह  कुर्सी पे ऐ लोगो
दसतार जीन्हें दी  है उन्हें  सर भी अता कर

नुक़सान, खुदा हमको मुनाफिक़ से बड़ा है
दुश्मन हो अगर दोस्त तो तू हमसे जुदा कर

ऊंचा है तेरा सर यह फक़त इन की बदौलत
मां-बाप के आ सामने तू सर  को झुका कर

कुछ दूसरो का    दर्द    अगर दिल में तेरे है
हाथों को उठा   कर तू ए इंसान   दुआ कर

ज़ीशान यह    दुनिया में दगा़ धोका बदी है
इंसान कहां जाएगा   अब जान   बचा कर

✍ ज़ीशान आज़मी

فیس بک ٹائمز کے زیر اہتمام 16 ویں بین الا قوامی
فی البدیہہ طرحی مشاعرہ میں میری کاوش

اللہ تو    لوگوں کو    مصیبت     سے   رہا کر
خاموش   تماشائی    کو     گویائی   عطا کر

شاہد ہوں میں کتنی گئی معصوم کی جانیں
مظلوم   کو پرسہ    دیں سبھی شمع جلا کر

بیٹھیں ہیں بنا دھڑ کے یہ کرسی پہ اے لوگو
دستار  جنہیں دی ہے  انہیں سر بھی عطا کر

نقصان    خدا   ہم    کو    منافق    سے بڑا ہے
دشمن   ہو   اگر  دوست تو تو ہم سے جدا کر

اونچا   ہے    ترا   سر    یہ فقط ان کے بدولت
ماں باپ   کے    آ سامنے   تو سر کو جھکا کر

کچھ   دوسروں   کا  درد اگر دل میں ترے ہے
ہاتھوں   کو   اٹھا   کر   تو   اے انسان دعا کر

ذیشان یہ   دنیا   میں   دغا ، دھوکہ ،بدی  ہے
انسان کہاں   جائگا    اب     جان   بچا     کر

✍ ذیشان آعظمی

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