Tuesday, December 5, 2017

Is Dahr ko ab uski sazaa dena chahiye

बुनियादे ज़ुल्मो ज़ोर     हिला     देना    चाहिए
अब तो सितमगरों     को      सज़ा देना चाहिए

तकलीफ    दूर होगी     कभी तो     गरीबों  की
मसनद    से ज़ालिमों    को हटा  देना    चाहिए

आदमी     का    खून पिया     जाती है   फक़त
बुग़ज़ो हसद    की आग   बुझा    देना   चाहिए

शैतां के   रास्ते    पे    हमेशा   जो     चलते   हैं
इस दह्र को अब    उसकी    सज़ा  देना चाहिए

तकलीफ का सबब है यह नफरत की आग भी
दिल में जो  कुछ हो    बात बता    देना चाहिए

ज़ीशान यह हदिस है,   इज़्ज़त    बड़ों की कर
बच्चे   अगर    है छोटे,    दुआ    देना   चाहिए

✍ ज़ीशान आज़मी

موجِ سخن کے تحت 215ویں بین الاقوامی
فی البدیہہ طرحی مشاعرہ میری ادنٰی کاوش:

بنیادِ ظلم    و   زور     ہلا دینا      چاہئے
اب تو ستم گروں  کو      سزا دینا چاہئے

تکلیفیں دور ہوگی  کبھی تو غریبوں کی
مسند سے     ظالموں    کو ہٹا دینا چاہئے

یہ آدمی     کا خون پئے   جاتی   ہے فقط
بغض و حسد کی     آگ   بجھا دینا چاہئے

شیطاں کے راستے پہ ہمیشہ جو چلتے ہیں
اس دھر   کو اب   اس کی سزا دینا چاہئے

تکلیف کا     سبب ہے یہ نفرت کی آگ بھی
دل میں جو کچھ ہو   بات بتا   دینا چاہئے

ذیشان یہ    حدیث ہے،  عزّت بڑوں کی کر
بچے اگر ہیں    چھوٹے    دعا     دینا چاہئے

✍ ذیشان آعظمی

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