Saturday, December 16, 2017

Kabhi kabhi to rawayat se inheraaf karein

पढ़े लिखों   से गुज़ारिश   है काम  साफ करें
कि जहल   दूर करें   ईल्म   इनकेशाफ   करें

समझ में आएगी हर बात इल्मो हिकमत की
दिलों   को   पहले   बुराई से लोग साफ करें

तू कामयाब   है मरने    से पहले    दुनिया में
अगर तुझे     तेरे मां    और    बाप माफ करें

सभी     है भाई मुसलमान     एक  उम्मत से
यह अच्छी   बात नहीं है कि इख़तेलाफ करें

सिवा कलामे खुदा के नहीं    है कुछ फीसद
कभी-कभी  तो रवायतय   से इनहेराफ करें

हमारे  घर में   है ज़ीशान  पानी की क़िल्लत
बुरा ना मानो  तो हम    चाय हाफ हाफ करें

✍ ज़ीशान आज़मी

موجِ سخن 217 ویں بین الاقوامی فی البدیہہ
طرحی آن لائن بین الاقوامی مشاعرے میں
میری یکجا کاوش :

پڑھے لکھوں سے گزارش ہے کام صاف کریں
کہ   جہل   دور    کریں    علم انکشاف کریں

سمجھ میں آئیگی ہر بات علم و حکمت کی
دلوں کو   پہلے  برائی   سے لوگ صاف کریں

تو   کامیاب  ہے مرنے  سے   پہلے   دنیا  میں
اگر تجھے   ترے   ماں اور باپ   معاف کریں

سبھی ہیں   بھائی   مسلمان   ایک امّت سے
یہ  اچھی  بات نہیں   ہے  کہ  اختلاف کریں

سوا کلامِ خدا کے    نہیں   ہے کچھ فی صد
کبھی کبھی   تو روایت    سے انحراف کریں

ہمارے گھر   میں  ہے   ذیشان  پانی کی قلّت
برا   نہ  مانو   تو   ہم    چائی ہاف ہاف کریں

✍ ذیشان آعظمی

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