Monday, December 18, 2017

Kya kya huwe paimane wafa kis ko khabar hai

गर दिल  में मुसलमां    के अल्लाह   का डर है
फिर मौत का इसको नहीं कुछ ख़ौफो खतर है

इस्लाम ही    मज़हब   है  पसंदीदा    खुदा का
बस इ सके इलावा   तो सभी    दिन    ज़रर है

मोमिन कभी    धोखा नहीं देता    है किसी को
अल्लाह  से    डरता है के   तक़वे का असर है

माबूद  को वह    देख नहीं   सकता है हरगिज़
दुनिया   में अगर   बंदे    की कमज़ोर नज़र है

बदनाम   हुआ   जाता है    इस्लाम    मुसलमां
दुनिया   को सिखा दीन अगर सीने में जिगर है

बंदो का यह  अल्लाह   से मदर के   शिकम में
क्या-क्या हुए   पैमाने वफ़ा   किसको खबर है

ज़ीशान   ज़माने   में करूं    किस    पे भरोसा
जिस चोर को   देखो  वही मस्जिद का सदर है

✍ ज़ीशान आज़मी

بزمِ سخنوراں کی 98/ ویں ہفتہ واری فی البدیہہ طرحی مشاعرہ میں میری کاوش:

گر   دل    میں    مسلمان    کے    اللہ   کا  ڈر ہے
پھر موت کا اس کو نہیں کچھ خوف و خطر ہے

اسلام    ہی    مذہب    ہے    پسندیدہ    خدا   کا
بس    اس    کے   علاوہ   تو  سبھی دین ضرر ہے

مومن   کبھی    دھوکا   نہیں   دیتا  ہے کسی کو
اللہ     سے   ڈرتا    ہے    کہ    تقوے     کا  اثر  ہے

معبود     کو    وہ    دیکھ   نہیں   سکتا  ہے ہرگز
دنیا    میں    اگر    بندے    کی    کمزور    نظر ہے

بدنام      ہوا     جاتا       ہے      اسلام     مسلماں
دنیا    کو    سکھا دین   اگر    سینے  میں جگر ہے

بندوں     کا    یہ    اللہ    سے   مادر کے شکم میں
کیا   کیا   ہوئے    پیمان  وفا    کس   کو   خبر ہے

ذیشان    زمانے     میں   کروں     کس پہ بھروسہ
جس    چور کو   دیکھوں وہی مسجد کا  صدر ہے

✍ ذیشان آعظمی

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