Tuesday, December 19, 2017

Mete qatil to mere apne hawaari nikle

शेर कहते   हो तो हर बात  तुम्हारी निकले
आप पर बीती  है जो   दास्तां सारी निकले

क़िरअते क़ुरां सिखाएं   मेरे बच्चों को कोई
क़ौम मे   ऐसा कोई एक   तो क़ारी निकले

नागहानी में   कभी ज़ाकिरो   मुल्लाओ के
हमने ईमान  टटोला तो वह   नारी  निकले

यह हक़ीक़त  है के होते   हैं दिखावे  वाले
दहर में जितने  थे मशहूर  भिकारी निकले

तजरिबा है कि  जहां तक गई है मेरी नज़र
जिस्मो दौलत के  कई लोग पुजारी निकले

एक पल्ले पे  मुसन्निफ  की लदी थी पोथी
मेरे दो   शेर   मगर दूजे   पे भारी   निकले

मरने के बाद   ही मालूम हुआ   है मुझको
मेरे क़ातिल तो   मेरे अपने  हवारी निकले

यह दुआ करते रहो  अपने खुदा से हरदम
जान  इस्लाम   पे ज़ीशान  हमारी  निकले

✍ ज़ीशान आज़मी

فیس بک ٹائمز ہفتہ وار فی البدیہہ 17
واں طرحی عالمی آن لائن مشاعرہ  میں
میری یکجا کاوش :

شعر   کہتے  ہو  تو  ہر بات   تمہاری نکلے
آپ پر بیتی  ہیں جو داستاں ساری  نکلے

قرئتِ قرآں سکھائے مرے بچوں کو کوئی
قوم   میں  ایسا کوئی ایک تو قاری نکلے

ناگہانی   میں   کبھی ذاکر و ملّا ؤں  کے
ہم   نے    ایمان  ٹٹولا   تو  وہ  ناری نکلے

یہ حقیقت ہے کہ ہوتے ہیں دکھاوے والے
دہر میں  جتنے تھے مشہور  بھکاری نکلے

تجربہ ہے کہ جہاں تک گئی ہے میری نظر
جسم و دولت کے  کئ  لوگ پجاری  نکلے

ایک پلہ  پہ مصنف   کی لدی تھی پوتھی
میرے دو شعر  مگر  دوجے پہ بھاری نکلے

مرنے کے  بعد  ہی معلوم ہوا  ہے  مجھکو
میرے قاتل تو   مرے  اپنے   حواری نکلے

یہ دعا کرتے   رہو   اپنے  خدا  سے ہر دم
جان   اسلام  پہ ذیشان     ہماری     نکلے

✍ ذیشان آعظمی

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