Thursday, December 28, 2017

Suraj ne kabhi raat ki zulmat nahi dekhi

क्या आयते    कुरआन की  अज़मत नहीं देखी
लिख्खें   हुए जुमलों   की बलाग़त   नहीं देखी

मस्जिद में   नमाज़ी    की गई   आदतें    देखी
क़ुरआन   कभी पढ़ने   की आदत   नहीं देखी

इस दौर में जाहिल की फक़त होती है इज़्ज़त
आलिम की यहां थोड़ी  भी इज़्ज़त नहीं देखी

हर शख्स  से ब्योपार   करो सोच   समझकर
फिर यह   न कहो मैंने   तो नियत   नहीं देखी

इंसान को नवाज़ा   है हर एक   शै से खुदा ने
उसने कभी   अपनी छुपी ताकत    नहीं देखी

कातिल है जाहालत का हर एक नूर खुदा का
सूरज ने   कभी   रात की ज़ुलमत नहीं   देखी

फरमाने   खुदा कहता है जन्नत  की तरफ आ
ज़ीशान   मगर    लोगों ने   जन्नत    नहीं देखी

✍ ज़ीशान आज़मी

فیس بک ٹائمز 18  ویں  بین الا قوامی فی البدیہہ طرحی مشاعرے میں میری ادنٰی کاوش:

کیا آیتِ قرآن     کی    عظمت    نہیں دیکھی
لکھّے ہوئے    جملوں کی  بلاغت نہیں دیکھی

مسجد میں   نمازی کی  کئی عادتیں  دیکھی
قرآن کبھی    پڑھنے  کی عادت  نہیں دیکھی

اس دور میں    جاہل کی فقط  ہوتی ہے عزت
عالم کی یہاں تھوڑی بھی عزت  نہیں دیکھی

ہر شخص سے   بیوپار   کرو سوچ سمجھ کر
پھر یہ نہ کہو     میں نے تو نیّت نہیں دیکھی

انساں   کو نوازا    ہے    ہر اک شے سے خدا نے
اس نے کبھی اپنی چھپی طاقت نہیں دیکھی

قاتل ہے جہالت   کا   ہر اک      نور      خدا کا
سورج نے   کبھی رات کی ظلمت نہیں دیکھی

فرمانِ خدا      کہتا       ہے   جنت کی طرف آ
ذیشان مگر     لوگوں     نے جنت نہیں دیکھی

✍ ذیشان آعظمی

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