Sunday, January 14, 2018

Ajsaam kaise kaise qabaon me rakh diye

इमान    कैसे-कैसे    खुदाओ    मे रख दिए
इंसां ने  अपनी  आखेरत दाओं में  रख दिए

किस तरह  इत्तेहाद का परचम  उठेगा अब
लोगों ने अपना   नफ्स अनाओ में रख दिए

कैसे बुलंद होगा    सर दुनिया    में आपका
हसती को जब अमीरों के पांव में राख दिए

इंसाफ आज    आप हुकूमत     का देखिये
अजसाम कैसे-कैसे     क़बाऔ में रख दिए

ज़ीशान हमको डर   नहीं है   इम्तिहान का
मां-बाप ने   हमें तो    दुवाओं में   रख दिए
✍ ज़ीशान आज़मी

موجِ سخن کے تحت 221 ویں بین الاقوامی
فی البدیہہ طرحی مشاعرہ میں میری کاوش :

ایمان کیسے کیسے    خداؤں    میں رکھ دیئے
انساں نے  اپنی  آخرت داؤں   میں   رکھ دیئے

کس طرح     اتحاد     کا    پرچم    اٹھےگا اب
لوگو نے     اپنا نفس    اناؤں    میں رکھ دیئے

کیسے     بلند ہوگا    سر،    دنیا میں    آپ  کا
ہستی کو جب امیروں کے پاؤں میں رکھ دیئے

انصاف     آج   آپ     حکومت     کا    دیکھئے
اجسام    کیسے کیسے     قباؤں میں رکھ دیئے

ذیشان     ہم کو     ڈر    نہیں    ہے امتحان کا
ماں باپ نے    ہمیں تو   دعاوں میں رکھ دیئے

✍ ذیشان آعظمی

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