Saturday, January 13, 2018

Dar o Diwaar chup saadhe huwe hain


नई सरकार    चुप    साधे      हुए हैं
यह सब    बेकार चुप   साधे   हुए हैं

सितम ढाते   फिरें गलियों  मोहल्लों
सरे     दरबार चुप   साधे   हुए    हैं

जिन्हें नुक़सा   का  अपने लगा डर
वही अखबार     चुप    सिधे हुए हैं

जुबां पर    होंगे सब के,    बाद मेरे
अभी अशआर    चुप साधे   हुए हैं

घरों    मे होती     हैं   मनसूबा  बंदी
दरो   दीवार   चुप    साधे     हुए हैं

तफक़्क़ुर सिर्फ एक ज़ीशान का है
सभी   अफकार   चुप  साधे हुए हैं

✍ ज़ीशान आज़मी

سائبان آنلائن ہفتہ وار فی البدیہہ
طرحی مشاعرہ میں میری کاوش :

نئی سرکار  چپ   سادھے  ہوئے ہیں
یہ سب بےکارچپ سادھے  ہوئے ہیں

ستم ڈھاتے    پھرے گلیوں محلوں
سرِ دربار چپ    سادھے    ہوئے ہیں

جنھیں  نقصان  کا    اپنے   لگا ڈر
وہی اخبار چپ   سادھے  ہوئے ہیں

زباں پر ہونگے   سب کے، بعد مرے
ابھی اشعار چپ  سادھے ہوئے ہیں

گھروں میں ہوتی ہے منصوبہ بندی
در و دیوار  چپ   سادھے ہوئے ہیں

تفکر    صرف    اک    ذیشان کا ہے
سبھی افکار چپ سادھے ہوئے ہیں

✍ ذیشان آعظمی

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