Tuesday, January 16, 2018

Hum se izhaar e madduaa na huwa

काम सड़कों पर वहशियाना हुआ
फेरी वालों का  सब ठीकाना हुआ

यह हुकूमत की काहिली के सबब
कब्ज़ा  सड़कों पे  ग़ासेबाना हुआ

हर    तरफ   गंदगी   पड़ी है यहां
मेरा नापाक    आशियाना   हुआ

कश्ती   पर था यक़ीन,   डूब गई
पासबां इस   का नाखुद ना हुआ

इल्म ही    सच्चा    साथी है तेरा
मरने के बाद    भी जुदा ना हुआ

रह गए   सब  अधूरे    काम मगर
हम से  इज़हारे मद्दुआ    ना हुआ

जब कभी दर्दे दिल की बात लिखी
शेर   ज़ीशान    का    यगाना हुआ

✍ ज़ीशान आज़मी

کام   سڑکوں    پہ وحشیانہ ہوا
پھیری والوں کا سب ٹھکانہ ہوا

یہ حکومت  کی کاہلی کے سبب
قبضہ   سڑکوں پہ غاصبانہ  ہوا

ہر طرف    گندگی  پڑی ہے یہاں
میرا       ناپاک     آشیانہ     ہوا

کشتی   پر تھا  یقین، ڈوب گئی
پاسباں    اس کا   نا خدا  نہ ہوا

علم ہی   سچا   ساتھی    ہے ترا
مرنے   کے   بعد بھی جدا نہ ہوا

رہ گئے   سب ادھورے   کام مگر
ہم    سے    اظہارِ مدعا     نہ ہوا

جب کبھی دردِ دل کی بات لکھی
شعر     ذیشان    کا     یگانہ  ہوا

✍ ذیشان آعظمی

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