Sunday, January 7, 2018

Kab dekhega mohtaje khirad khud ki nazar se

रोशन किया    रब ने   जहां    शम्सो क़मर से
दुनिया की    बक़ा उसने रखी इसके सफर से

गुलशन   न   कभी होगा   यह आबाद हमारा
बर्बाद है   कमज़ोर   हुकूमत    के    असर से

मंज़िल भी   कदम चूमती   है फख्र  से उसके
हटता नहीं    जो शक्स  कभी अपनी डगर से

हर ज़ुल्म पे    खामोशी  क़यामत का सबब है
कब देखेगा मोहताजे खिरद खुद की नज़र से

तैयार है    चलने     के लिए   राहे    खुदा पर
ज़ीशान    कभी   रुकता नहीं   मौत के डर से

✍ ज़ीशान आज़मी

سائبان آنلائن ہفتہ وار فی البدیہہ طرحی
مشاعرہ میں میری کاوش :

روشن کیا   رب نے جہاں  شمس و قمر سے
دنیا کی  بقا اس نے رکھی اس کے سفر سے

گلشن    نہ     کبھی     ہوگا    یہ  آباد ہمارا
برباد    ہے کمزور   حکومت    کے   اثر   سے

منزل بھی قدم چومتی ہے فخر سے اس کے
ہٹتا نہیں   جو شخص   کبھی اپنی ڈگر سے

ہر ظلم   پہ    خاموشی   قیامت کا سبب ہے
کب دیکھےگا   محتاجِ خرد خود کی نظر سے

تیار   ہے  چلنے     کے لئے     راہِ     خدا   پر
ذیشان   کبھی  رکتا   نہیں موت کے ڈر سے

✍ ذیشان آعظمی

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