Tuesday, January 23, 2018

Khud se sawaal karte hai har baar kya karein

मसनद पे सारे    बैठे हैं बेकार    क्या करें
करते हैं   रहनुमाई का    इज़हार क्या करें

इल्मो हुनर की अब कोई इज़्ज़त नहीं रही
बैठे हुए   हैं घर में जो   फनकार क्या करें

झांसे में  उनके     आते    हैं ईमानदार भी
झूठों के     आगे कोई   वफादार क्या करें

मजबूर हो    के सुनता है वह इल्तेजा मेरी
एहसां तले   दबा हो    तो इंकार  क्या करें

हर वक्त    बेवकूफ    ही कहते   रहे अगर
मजलिस में आने वाले समझदार क्या करें

कोई    जवाब है    नहीं मेरे    सवाल  का
खुद से सवाल   करते हैं हर बार क्या करें

ज़ीशान जब खुदा की मदद साथ साथ हो
जीना हमारा   मोअतरिज़ दुश्वार  क्या करें

✍ ज़ीशान आज़मी

ہفت روزہ فیس بُک ٹائمز کے ۲۲ وییں عالمی
آنلاین فی ای البدیہہ طرحی مشاعرے بتاریخ
۲۲ جنوری ۲۰۱۷ کے لئے میری طبع آزمائی

مسند پہ    سارے بیٹھے   ہیں بیکار کیا کریں
کرتے ہیں    رہنمائی     کا   اظہار     کیا کریں

علم و ہنر کی     اب کوئی      عزت نہیں رہی
بیٹھیں ہوئے ہیں گھر میں جو فنکار کیا کریں

جھانسے   میں ان کے   آتے ہیں ایمان دار بھی
جھوٹوں کے     آگے کوئی    وفادار   کیا کریں

مجبور ہو     کے سنتا     ہے     وہ   التجا مری
احساں     تلے     دبا ہو    تو     انکار کیا کریں

ہر وقت      بے وقوف     ہی کہتے      رہے اگر
مجلس     میں آنے    والے سمجھدار کیا کریں

کوئی    جواب     ہے نہیں    میرے   سوال کا
خود   سے    سوال    کرتے ہیں ہر بار کیا کریں

ذیشان    جب    خدا کی   مدد ساتھ ساتھ ہو
جینا    ہمارا  معترض     دشوار      کیا  کریں

✍ ذیشان آعظمی

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