Monday, January 8, 2018

Mera qabila samandar hai, zaat darya hai

खुदा का बंदा  हूं मैं, मेरा   क़िबला काबा  है
मैं हम्द उसकी ही करता हूं कि वह अच्छा है

मैं मौज   हूं   कि मुसलसल   मेरी  रवानी है
मेरा   क़बीला   समंदर है,    ज़ात  दरिया है

यही वह ज़ात है जिसको खुदा ने बन्दा कहा
ज़माना देख! मोहम्मद(स)  का नाम ऊंचा है

खयाल जिंदगी    भर पाको साफ रखना तू
के कामयाब है   वह जिसने अच्छा सोचा है

खुलूसे दिल से किया  नेक काम जिसने भी
उसी का देखिये    ज़ीशान आज   चरचा है

✍ ज़ीशान आज़मी

موجِ سخن کے تحت 220 ویں بین الاقوامی
فی البدیہہ طرحی مشاعرہ میں میری کاوش :

خدا کا بندہ   ہوں   میں،    میرا  قبلہ کعبہ ہے
میں حمد اس کی ہی کرتا ہوں کہ وہ اچھا ہے

میں   موج    ہوں   کہ مسلسل مری روانی ہے
مرا     قبیلہ    سمندر ہے،      ذات    دریا    ہے

یہی وہ    ذات   ہے جس  کو خدا نے بندہ کہا
زمانہ     دیکھ    محمد(ص)   کا نام اونچا ہے

خیال زندگی    بھر    پاک و صاف    رکھنا تو
کہ   کامیاب ہے   وہ   جس نے اچھا سوچا ہے

خلوصِ دل  سے   کِیا نیک    کام جس نے بھی
اسی کا    دیکھئے     ذیشان    آج    چرچا ہے

✍ ذیشان آعظمی

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