Tuesday, January 30, 2018

Sab ke sab bhool gaye harfe sadaqat likhna

काम ख़ालिक़ का है हर शख्स की क़िस्मत लिखना
दौलतो रिज़्क़   कभी   इज़्ज़तो   ज़िल्लत  लिखना

ए खुदा    जीते है  मुश्किल    से   तेरी    दुनिया में
नेक इंसान     की    क़िस्मत    में तू जन्नत लिखना

हमको    नफरत ही मिली    जिंदगी   भर लोगों से
दिल के अवराक़ पे, मुश्किल   है मोहब्बत लिखना

किसकी औक़ात    है दुनिया    में लगाए    क़ीमत
यह तो  मुमकिन ही नहीं इश्क़ की  क़ीमत लीखना

आयतें   तेरी मैं    पढ़ता हूं    शब-ओ-रोज़    यहां
मेरी क़िस्मत    में तू महशर   में शफाअत लिखना

जिंदगी फर्श   पे कुछ    इतनी     गिरा    गुज़री है
सब के   सब भूल    गए हरफे सदाक़त   लिखना

कौल सच्चा     है यह     ज़ीशान    मगर  याद रहे
जब भी क़िरतास पे लिखना  तो हक़ीक़त लिखना

✍ ज़ीशान आज़मी

فیس بک ٹائمز کا 23 واں عالمی آن لائن
فی البدیہہ طرحی مشاعرہ میں میری کاوش :

کام خالق    کا ہے   ہر شخص کی قسمت لکھنا
دولت و رزق    کبھی    عزت   و    زلّت   لکھنا

اے خدا     جیتے ہے   مشکل سے تری دنیا میں
نیک انسان  کی  قسمت میں   تو    جنّت  لکھنا

ہم کو    نفرت ہی    ملی زندگی   بھر لوگو سے
دل کے    اوراق     پہ   مشکل  ہے محبت لکھنا

کس   کی اوقات    ہے   دنیا   میں لگائے قیمت
یہ تو   ممکن    ہی نہیں عشق کی قیمت لکھنا

آیتیں   تیری   میں پڑھتا ہوں شب و روز یہاں
میری قسمت میں تو محشر میں شفاعت لکھنا

زندگی    فرش    پہ     کچھ  اتنی گرا گزری ہے
سب کے   سب بھول   گئے حرف صداقت لکھنا

قول سچّا   ہے   یہ     ذیشان     مگر    یاد  رہے
جب بھی    قرطاس   پہ لکھنا تو حقیقت لکھنا

✍ ذیشان آعظمی

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