Monday, February 19, 2018

Phir yeh milte hain to ghamkhaar nazar aate hain

جا بجا   دین   کے    غدار   نظر    آتے ہیں
لوگ    باطل    کے    طرفدار  نظر آتے ہیں
غم ہمیں  پہلے یہ  دیتے ہیں سیاست والے
پھر یہ   ملتے ہیں تو غمخوار نظر آتے ہیں
پہلے   اخبار میں  تصویر چھپا کرتی تھی
آج   تصویروں   میں  اخبار   نظر آتے ہیں
دوستو    کیسے   علاج  اپنا کرائے ان سے
ڈاکٹر   خود بھی   تو   بیمار نظر آتے ہیں
دیس کا حال  ذرا غور سے دیکھو صاحب
لوگ    سرکار    سے   بیزار  نظر   آتے ہیں
ظلم  ہوتا ہے مگر  لوگ ہیں خاموش یہاں
یہ  فقط   کہنے کو      بیدار  نظر آتے ہیں
تو نے ذیشان لکھا دل سے جو اشعار یہاں
بس وہی   عوج    پہ   اشعار نظر آتے ہیں
✍ ذیشان آعظمی

जा बजा    दिन के    गद्दार    नज़र   आते  हैं
लोग    बातिल    के तरफदार    नज़र आते हैं
ग़म हमें    पहले    यह देते हैं   सियासत वाले
फिर    मिलते हैं    तो   ग़मखार नज़र आते हैं
पहले    अखबार में    तस्वीर छपा   करती थी
आज तस्वीरों    में    अखबार   नज़र आते हैं
दोस्तों   कैसे   इलाज अपना    कराए   उनसे
डॉक्टर   खुद भी    तो    बीमार नज़र आते हैं
देश   का हाल    जरा   गौर   से देखो   साहब
लोग   सरकार    से   बेज़ार    नज़र   आते हैं
ज़ुल्म होता   है मगर   लोग हैं   खामोश  यहां
यह फ़क़त  कहने को   बेदार  नज़र   आते हैं
तूने ज़ीशान लिखा दिल से जो अशआर  यहां
बस वही   औज पर   अशआर नज़र आते  हैं

✍ ज़ीशान आज़मी

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