Monday, February 12, 2018

Tum achche masiha ho shifa kiyo nahi dete

सब रास्ते  बातिल के   मिटा क्यों  नहीं देते
रहबर हमें मनज़िल का पता क्यों नहीं  देते

अल्लाह पर ईमान है,  भरोसा   भी  हमारा
शैतान  अगर तुम   हो दगा़  क्यों  नहीं देते

कमजो़री हुकूमत   की है या दाल में काला
रस्ते   की रुकावट  को   हटा क्यों नहीं देते

फरियाद अगर जाती नहीं उसकी खुदा तक
मज़लूम को सब मिलके दुआ क्यों नहीं देते

खा-खा के में हर  कि़स्म की बीमार हुआ हूं
तुम लोग कोई  अच्छी दवा  क्यों   नहीं देते

रहते हो  मुनाफिक़   की तरह  साथ   हमारे
तुम दिल   की छुपी बात  बता क्यों नहीं देते

शाफी नहीं अपना कोई खालिक़ के इलावा
तुम अच्छे मसीहा हो? शिफा क्यों नहीं देते

ज़ीशान   अगर दोस्तों!    मोहताजे दुआ है
हाथों को   उठाकर के   दुआ क्यों नहीं देते

✍ ज़ीशान आज़मी

آنلائن فیس بک ٹائمز کے زیر اہتمام 25 .ویں بین الا قوامی فی البدیہہ طرحی مشاعرے میں میری کاوش :

سب راستے  باطل کے  مٹا کیوں نہیں دیتے
رہبر    ہمیں منزل کا  پتا   کیوں  نہیں دیتے
اللہ پہ ایمان    ہے     بھروسہ   بھی    ہمارا
شیطان   اگر تم    ہو   دغا کیوں نہیں دیتے
کمزوری   حکومت   کی  ہے یا دال میں کالا
رستے کی   رکاوٹ   کو ہٹا کیوں نہیں دیتے
فریاد اگر   جاتی   نہیں   اس   کی  خدا تک
مظلوم کو سب مل کے دعا کیوں نہیں دیتے
کھا کھا   کے  میں ہر قسم کی بیمار ہوا ہوں
تم لوگ   کوئی   اچھی دوا کیوں نہیں دیتے
رہتے ہو  منافق   کی   طرح   ساتھ    ہمارے
تم دل کی چھپی  بات  بتا کیوں نہیں دیتے
شافی   نہیں   اپنا   کوئی  خالق   کے علاوہ
تم اچھے مسیحا   ہو؟ شفا کیوں نہیں دیتے
ذیشان      اگر   دوستوں!   محتاجِ دعا    ہے
ہاتھوں  کو  اٹھا کر کے دعا کیوں نہیں دیتے

✍ ذیشان آعظمی

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