Friday, February 23, 2018

Tune to bakhsh di hame zillat ki zindagi

ए दोस्त यह भी कोई है इज़्ज़त की ज़िंदगी
नफरत की  जिंदगी,  अदावत   की जिंदगी
लोगों ने   समझा ही   नही   मेरी हयात को
तेरे लिए  है    मेरी   मोहब्बत    की जिंदगी
जंगल में  जा के बसना ही  बेहतर लगे मुझे
इस शहर में  कहां  है  शराफत  की जिंदगी
इस दौर    से   बचाए    खुदारा    हमें कोई
दुश्वार   हो   गई    है राहत    की    जिंदगी
शैतान का   हिसार है मस्जिद के आसपास
किस तरह बच सकेंगी  इबादत की जिंदगी
नेता  हमारा बन के   किया   दरबदर   हमें
तू ने तो बख्श दी हमें ज़िल्लत  की ज़िंदगी
ज़ीशान   शुक्र करता   हूं परवरदिगार   का
अच्छी गुज़र   रही है   क़नाअत की जिंदगी

✍ ज़ीशान आज़मी

سائبان آنلائن ہفتہ وار فی البدیہہ طرحی
مشاعرہ میں میری کاوش :

اے دوست یہ بھی کوئی ہے عزت کی زندگی
نفرت کی   زندگی   یہ   عداوت   کی زندگی
لوگو  نے   سمجھا   ہی نہیں میری حیات کو
تیرے    لئے    ہے  میری   محبت کی   زندگی
جنگل میں   جا کے  بسنا ہی بہتر لگے مجھے
اس شہر   میں  کہاں  ہے شرافت  کی زندگی
اس دور   سے   بچائے    خدارا   ہمیں  کوئی
دشوار   ہو  گئی   ہے یہ راحت   کی   زندگی
شیطان   کا   حصار   ہے مسجد کے آس پاس
کس   طرح بچ   سکیں گی عبادت کی زندگی
نیتا   ہمارا   بن    کے    کِیا    در  بدر    ہمیں
تو نے تو بخش   دی   ہمیں   ذلت کی زندگی
ذیشان   شکر     کرتا    ہوں     پروردگار   کا
اچھی    گزر    رہی     ہے  قناعت  کی زندگی

✍ ذیشان آعظمی

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