Thursday, March 15, 2018

Hai Salaam e Ahmad e Mukhtar Baqar ke liye

दहर  में  कब   लोग थे अग़यार   बाक़र के   लिए
एक से थे तिलमीज़ो   पैरोकार    बाक़र   के लिए

यह विलादत    की घड़ी है  एक रजब को देखिए
है फिज़ा हर सिम्त     खुशबूदार बाक़र    के लिए

अपना जौहर    कर्बला में   वह दिखा    देते मगर
कमसिनी    की थी खड़ी    दीवार  बाक़र के लिए

वह शमा क्यों न जलाते इल्मो हिकमत की भला
जब के बेहतर वक्त था  हमवार   बाक़र के लिए

लिख  दिया था एक मुनासिब वक्त पर अल्लाह ने
इंकलाबी   दर्स   का   किरदार    बाक़र    के लिए

यह फज़िलत कम है क्या? क़ब्ले विलादत देखिए
है सलामे  अहमद  मुख्तार    बाक़र    के      लिए

हर मुसलमां के   लिए कि,  एक वसीयत आखिरी
पांच नुक़ते कुछ   न    थे दुशवार   बाक़र के लिए

हश्र के मैदान    में इस   का सिला    देना     खुदा
जो लिखे ज़ीशान    ने     अशआर बाक़र के लिए

✍ ज़ीशान आज़मी

دہر   میں   کب لوگ تھے    اغیار باقر کے لئے
اک   سے  تھے   تلمیذ و پیروکار   باقر کے لئے 

یہ ولادت  کی گھڑی ہے اک رجب کو دیکھئے
ہے    فضا    ہر سمت   خوشبودار باقر کے لئے

اپنا  جوہر   کربلا میں   وہ  دکھا دیتے   مگر
کمسنی کی  تھی    کھڑی  دیوار  باقر کے لئے

وہ شمع کیو نہ جلاتے علم و حکمت کی بھلا
جب  کے بہتر   وقت   تھا   ہموار باقر کے لئے

لکھ   دیا   تھا    اک  مناسب وقت پر اللہ نے
انقلابی    درس    کا    کردار      باقر  کے لئے

یہ فضیلت   کم ہے کیا؟   قبلِ ولادت دیکھئے
ہے   سلامِ   احمدِؐ    مختار      باقر     کے لئے

ہر مسلماں   کے   لئے کی   اک  وصیت آخری
پانچ نقطے کچھ   نہ تھے  دشوار باقر کے لئے

حشر کے  میدان   میں  اس کا صلہ دینا خدا
جو   لکھے  ذیشان   نے   اشعار  باقر  کے لئے

✍ ذیشان آعظمی

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