Monday, March 26, 2018

Mai pooch to loo paau ki zanzeer se pahle

चलती है कलम  दहर  मे शमशीर से पहले
कुछ सोच लिया कर कभी तहरीर से पहले

कोशां है तू क्यों रिज़्क़ की खातिर मेरे भाई
हासिल नहीं  होता कभी  तकदीर से पहले

मुल्ला हमें   मेंबर    से कहानी न   सुनाओ
पढ़ लो ज़रा   कुरान को तफसीर  से पहले

क्या खूब लगाया   तूने नजरों  का निशाना
हम हो गए  घायल   भी तेरे तीर   से पहले

मिलने के लिए आप  भी इतवार को आना
फुरसत मे रहा  करते हैं हम पीर से। पहले

हाथों मे   लिए   देखता  हूं    याद   में तेरी
तू सामने   होती थी    यह तस्वीर से पहले

इस राह से वाक़िफ हूं  मै ज़ीशान ठहर जा
मै पूछ तो  लूं   पाओ की   ज़ंजीर से पहले

✍ ज़ीशान आज़मी

چلتی    ہے    قلم    دہر  میں شمشیر سے پہلے
کچھ   سوچ    لیا   کر   کبھی  تحریر سے پہلے

کوشاں ہے تو کیوں رزق کی خاطر میرے بھائی
حاصل   نہیں    ہوتا    کبھی    تقدیر  سے پہلے

ملاّ      ہمیں   منبر    سے    کہانی    نہ    سناؤ
پڑھ لو      ذرا    قرآن    کو     تفسیر سے پہلے

کیا    خوب    لگایا تو     نے نظروں     کا نشانہ
ہم    ہو    گئے     گھائل بھی ترے تیر سے پہلے

ملنے    کے     لئے     آپ     بھی    اتوار   کو آنا
فرصت    میں     رہا  کرتے ہیں ہم پیر سے پہلے

ہاتھوں    میں   لئے دیکھتا ہوں    یاد میں تیری
تو    سامنے    ہوتی    تھی یہ  تصویر سے پہلے

اس راہ    سے واقف    ہوں  میں ذیشان ٹہر جا
میں   پوچھ   تو  لوں پاؤں کی زنجیر سے پہلے

✍ ذیشان آعظمی

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