Wednesday, March 21, 2018

Musawwir ka zauq e jamal auj par hai

ब फज़्ले खुदा   हर कमाल औज पर है
मेरे हर सितारे   की चाल  औज   पर है

भला शहर   में अमन ओ आमान कैसा
यतिमो   का रंजो मलाल    औज पर है

मैं किसको    सुनाऊंगा  अपनी मिसालें
के झूठों कि हर   मिसाल   औज पर है

नज़ारा    कोई      खूबसूरत    दिखेगा
मुसव्विर का ज़ौक़े जमाल औज पर है

तेरा शेर    ज़ीशान क्यों    ना   पढ़ें हम
यकीनन तेरा    हर  ख्याल औज पर है

✍ ज़ीशान आज़मी

بہ فضلِ   خدا   ہر کمال  اوج پر ہے
مرے ہر  ستارے کی چال اوج پر ہے

بھلا  شہر  میں   امن   و آمان کیسا
یتیموں  کا رنج   و ملال اوج  پر ہے

میں کس  کو سناؤں گا اپنی  مثالیں
کہ جھوٹوں کی ہر مثال اوج   پر ہے

نظارہ   کوئی   خوبصورت   دِکھےگا
مصور   کا   ذوقِ  جمال اوج   پر ہے

ترا شعر ذیشان  کیوں نہ  پڑھیں ہم
یقیناً    ترا ہر      خیال   اوج  پر ہے

✍ ذیشان آعظمی

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