Sunday, March 4, 2018

Shajar ne tund hawaaon se dosti kar li

खुदा के बन्दों    ने यह कैसी    जिंदगी कर ली
के रब को   छोड़ के शैतां   कि बन्दगी कर ली

गरीब   लोगो का   हक़ मार कर खुदा के लिए
अमीर बन्दों   ने    मस्जिद में   रोशनी कर ली

हमें बचा  ले खुदा    शर से     अब  ज़माने के
हमारे नफ्स    ने  शैतां   से दिल्लगी   कर  ली

सबूत बन्दगी    का इससे   बड़ के   क्या होगा
खुदा    के    इश्क़ में अपनों से दुश्मनी कर ली

मिला    है    दर्द    मुझे   तेरी    बेवफाई    से
यह दिल   ने आप  से बेकार आशिक़ी कर ली

बुरी खबर  है   के अब   उजड़ेगा चमन अपना
शजर ने   तुंद     हवाओं    से दोस्ती   कर ली

खुदा की करना था ज़ीशान मुझको हम्दो सना
क़लम   उठाया    मैंने   और    शायरी कर ली

✍ ज़ीशान आज़मी

خدا کے   بندوں    نے  یہ کیسی زندگی کر لی
کہ رب کو چھوڑ کے شیطاں کی بندگی کر لی

غریب    لوگو    کا    حق   مار کر خدا کے لئے
امیر بندو    نے    مسجد    میں روشنی کر لی

ہمیں بچا لے   خدا   شر    سے اب    زمانے کے
ہمارے    نفس   نے شیطاں سے دل لگی کر لی

ثبوت    بندگی    کا اس  سے بڑھ کے کیا ہوگا
خدا کے  عشق میں   اپنوں سے دشمنی کر لی

ملا ہے    درد    مجھے    تیری   بے وفائی سے
یہ دل    نے    آپ    سے    بیکار عاشقی کر لی

بری خبر ہے     کہ    اب  اجڑے    گا چمن اپنا
شجر    نے    تند    ہواؤں    سے دوستی کرلی

خدا کی    کرنا تھا ذیشان مجھ کو حمد و ثنا
قلم اٹھایا    میں    نے    اور    شاعری   کر لی

✍ ذیشان آعظمی
سائبان گروپ

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