Sunday, March 4, 2018

Yaad e firaaq e yaar tera shukriya bahut

कुछ बनने   के लिए मैंने  मेहनत किया बहुत
मंजिल से   मेरी फिर भी   रहा फासला बहुत

तुमसे छुपाए    छुप न सका    ग़म मेरा मगर
मैंने रखा    जुदाई में     भी    हौसला  बहुत

आसां है   आज इल्म    का पाना  हमें मगर
ख़ालिक़ की मारेफत से हैं ना आशना बहुत

होती    नहीं जुदा के   तू दिल का  सुकून है
यादें फिराक़े    यार     तेरा    शुक्रिया बहुत

नज़रे उठा    के देख    तो मिल जाएंगे तुझे
ज़ीशान    आज    दोस्तों में   बेवफा   बहुत

✍ ज़ीशान आज़मी

کچھ بن نے   کے لئے میں نے محنت کیا بہت
منزل سے    میری   پھر بھی رہا فاصلہ بہت

تم سے    چھپائے چھپ نہ سکا غم مرا مگر
میں نے رکھا جدائی میں بھی حوصلہ بہت

آساں ہے    آج   علم    کا پانا   ہمیں     مگر
خالق کی    معرفت   سے   ہیں نا آشنا بہت

ہوتی    نہیں   جدا کہ   تو دل کا سکون ہے
یادِ    فراقِ       یار     ترا     شکریہ     بہت

نظریں اٹھاکے   دیکھ تو مل جائینگے تجھے
ذیشان   آج   دوستوں    میں   بے وفا بہت

✍ ذیشان آعظمی
دیا گروپ

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