Monday, April 16, 2018

Is kamayee pe to izzat nahi milne wali

यूं ही  आराम   से जन्नत   नहीं   मिलने वाली
बद अक़ीदों  को यह नेमत  नहीं मिलने वाली

जिनका अशआर  से बनता है अक़ीदा सुन लें
उनको क़ुरआं की शफाअत नहीं मिलने वाली

अपने   हाथों से   लिखो चाहे किताबें जितनी
उसको क़ुरआं पे फज़ीलत  नहीं मिलने वाली

दूर क़ुरआन  से रहके  कभी   इस   दुनिया में
हमको ईमान की   दौलत   नहीं  मिलने वाली

रोज पढ़ते   रहो   क़ुरआन   मुसलमानों  तुम
वरना  दुनिया   में हिदायत  नहीं मिलने वाली

नौकरी गर है  खुशामत की तो करना ही नहीं
इस कमाई पे  तो इज़्ज़त   नहीं  मिलने वाली

वक्त ज़ीशान  मिले  तुमको  तो  क़ुरआन पढ़ो
बाद फिर मरने की मोहलत नहीं मिलने वाली

✍ ज़ीशान आज़मी

یوں  ہی   آرام  سے جنّت نہیں ملنے والی
بد  عقیدوں  کو یہ نعمت نہیں ملنے والی

جن  کا  اشعار  سے بنتا ہے عقیدہ سن لیں
ان کو   قرآں کی  شفاعت نہیں ملنے والی

اپنے  ہاتھوں سے لکھو چاہے کتابیں جتنی
اس  کو قرآں   پہ فضیلت نہیں ملنے والی

دور قرآن   سے رہ  کے کبھی اس دنیا میں
ہم کو ایمان    کی   دولت نہیں ملنے والی

روز   پڑھتے    رہو   قرآن   مسلمانوں   تم
ورنہ   دنیا    میں   ہدایت نہیں ملنے والی

نوکری گر ہے خوشامد کی تو کرنا ہی نہیں
اس    کمائی    پہ تو عزّت نہیں ملنے والی

وقت ذیشان    ملے   تم کو   تو قرآن پڑھو
بعد پھر   مرنے    ک  مہلت نہیں ملنے والی

✍ ذیشان آعظمی

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