Monday, April 2, 2018

Yeh maan liya maine tu zardaar bahut hai

गुमराही का अब  दहर में  आसार   बहुत है
क़ुर्आन    हिदायत   के लिए   यार  बहुत है

ऐ दोस्त   फक़त  आयते कुरान  पढ़ा   कर
महमूल कुतुब  खानों का    अंबार  बहुत है

ग़ाफिल जो रहा करता है दुनिया में खुदा से
वह ख़ाहिशे दुनिया  का  तलबगार बहुत  है

जिस घर में तिलावत  नहीं होती है ज़रा भी
वह   पाक  मकां हो   भी तो बेकार बहुत है

हर एक को तौफिक़  खुदाया  तू  अता  कर
मुस्लिम का यहां  बदनुमा किरदार  बहुत है

सीने    में   तेरे    आयते   कुरान   अगर  है
यह मान   लिया  मैंने   तू    ज़रदार बहुत है

ज़ीशान तू अल्लाह  की  रस्सी को पकड़ ले
के गर्म यहां   फतवों   का  बाज़ार   बहुत है

✍ ज़ीशान आज़मी

گمراہی     کا اب     دہر    میں آثار بہت ہے
قرآن    ہدایت      کی      لئے    یار بہت ہے

اے دوست     فقط     آیتِ قرآن     پڑھا کر
محمول   کُتب خانوں    کا     انبار  بہت ہے

غافل   جو    رہا کرتا   ہے دنیا میں خدا سے
وہ    خواہشِ دنیا    کا     طلبگار     بہت ہے

جس گھر میں تلاوت نہیں ہوتی ہے ذرا بھی
وہ    پاک    مکاں    ہو بھی تو بیکار بہت ہے

ہر اک    کو    توفیق    خدایا     تو   عطا کر
مسلم    کا یہاں    بد نما      کردار   بہت ہے

سینے    میں      ترے     آیتِ قرآن     اگر ہے
یہ    مان     لیا میں     نے   تو زردار بہت ہے

ذیشان    تو    اللہ   کی     رسّی    کو پکڑ لے
کہ    گرم     یہاں    فتووں   کا بازار بہت ہے

✍ ذیشان آعظمی

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