Monday, May 7, 2018

Aa raha hoo ke jaa raha hoo mai

रस्मे    दुनिया    जला  रहा हूं मैं
खुद    को    बंदा  बना रहा हूं मैं

फिर    से  कुरआं उठा रहा हूं मैं
नूर ए ईमान    पा      रहा   हूं मैं

खोल कर बैठा हूं कलाम ए खुदा
शिर्क    से     दूर   जा  रहा हूं मैं

मेरे   चेहरे   पे  इसलिए     है नूर
मौलवी  से    जुदा    रहा    हूं मैं

लोग कुरान  की अब कहां सुनते
बात   हक़ है    सुना    रहा हूं मैं

मेरा  परवरदिगार   जाने फक़त
आ रहा    हूं के    जा रहा  हूं मैं

थोड़ा    ज़ीशान   इंतजार   करें
पढ़ने   कुरान   आ     रहा हूं मैं

✍ ज़ीशान आज़मी

رسمِ دنیا    جلا     رہا ہوں میں
خود  کو   بندہ  بنا رہا ہوں میں

پھر  سے قرآں اٹھا رہا ہوں میں
نورِ ایمان    پا  رہا     ہوں   میں

کھول کر   بیٹھا ہوں  کلامِ خدا
شرک   سے  دور جا رہا ہوں میں

میرے چہرے پہ اس لئے ہے نور
مولوی   سے   جدا  رہا ہوں میں

لوگ   قرآن   کی اب کہاں سنتے
بات   حق   ہے سنا  رہا ہوں میں

میرا     پروردگار    جانے    فقط
آ رہا    ہوں   کہ جا  رہا ہوں میں

تھوڑا    ذیشان    انتظار   کریں
پڑھنے    قرآن    آ رہا   ہوں میں

✍ ذیشان آعظمی

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