Tuesday, May 1, 2018

Ab zaroori hai ke Narjis ka pisar aa jaye

काश हम सब  की दुआओं  में असर आ जाए
नुसरते दीं  के   लिए हक़  का  क़मर आ जाए

यह जहां नूर  से  क्योंकर   ना   मुनव्वर  होगा
युसुफे ज़हरा का   चेहरा जो   नज़र आ  जाए

कब्र से मुर्दे  भी उठ जाएंगे   नुसरत   के लिए
उनको मेहदी   की अगर  कोई खबर आ जाए

परद ए ग़ैब   से हो   जाए जो महदी का ज़ुहूर
बहरे  ज़ुलमात   में तूफानो   भंवर    आ जाए

क़ौम क़ुरआं   को भुला   कर हो रही है मुरतद
अब जरूरी है के नरजिस का पिसर आ जाए

मारेफत मिलती रहे दुनिया मे महदी की अगर
हक़ से ज़ीशान  को जीने  का   हुनर आ जाए

✍ ज़ीशान आज़मी

کاش    ہم     سب  کی  دعاؤں   میں اثر آ جائے
نصرتِ دیں     لئے     حق     کا     قمر    آ جائے

یہ جہاں    نور    سے    کیوں   کر  نہ منور ہوگا
یوسفِ زہرہ    کا     چہرا     جو     نظر   آ جائے

قبر سے مردے بھی اٹھ جائیں گے نصرت کے لئے
ان  کو    مہدی    کی    اگر    کوئی  خبر  آ جائے

پردئے   غیب   سے   ہو جائے  جو مہدی کا ظہور
بحرِ ظلمات    میں    طوفان   و   بھنور    آ جائے

قوم    قرآں    کو     بھلا    کر  ہو   رہی ہے مرتد
اب    ضروری    ہے   کے   نرجس کا  پسر آ جائے

معرفت   ملتی   رہے    دنیا میں   مہدی  کی  اگر
حق    سے   ذیشان    کو    جینے    کا  ہنر آ جائے

✍ ذیشان آعظمی

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