Wednesday, May 9, 2018

Jab se karbobala dekh aayaa hai dil

हम्दे  ख़ालिक़ हमेशा   से करता  है दिल
क्यूं के दिन    रात कुरान   पढ़ता है दिल

नोके नैज़ा    पे    जो थी   लबे शाह  पर
उस तिलावत को हर रोज़ सुनता है दिल

जब भी नहजुल  बलाग़ा को पढ़ता हूं मैं
या अली   या अली   खूब कहता है दिल

गूंजती है रगों   में      सदा    या   हुसैन
जबसे    कर्बोबला देख    आया है दिल

मैं ने ज़ीशान    कुरआन   जब  भी पढ़ा
बस मुसलमान मरने को  कहता है दिल

✍ ज़ीशान आज़मी

حمدِ خالق   ہمیشہ     سے     کرتا ہے دل
کیوں   کے   دن رات   قرآن پڑھتا ہے دل

نوکِ نیزہ    پہ     جو    تھی لبِ  شاہ پر
اس    تلاوت    کو   ہر   روز سنتا ہے دل

جب بھی نہج البلاغہ کو پڑھتا ہوں میں
یا علی     یا علی    خوب     کہتا ہے دل

گونجتی  ہے    رگوں میں صدا یا حسین
جب   سے   کرب وبلا  دیکھ  آیا ہے دل

میں نے    ذیشان   قرآن   جب بھی پڑھا
بس مسلمان    مرنے     کو کہتا    ہے دل

✍ ذیشان اعظمی

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