Monday, June 11, 2018

Khusboo meri saansoN me basaa Eid ka din hai

ہر دن   با خدا    دوستی     کا  عید کا دن ہے
تحفہ یہ جسے  دے دے    خدا عید کا دن ہے

اک   بار   مرے گھر   پہ تو    تشریف تو لے آ
خوشبو مری سانسوں میں بسا عید کا دن ہے

مدت سے     ملاقات  نہیں تجھ سے ہوئی ہے
اس  سال تو    گھر اپنے    بُلا عید   کا دن ہے

مجھ    سے    نہ تفرقہ کی کبھی بات کیا کر
اب آجا    گلے   مجھ     کو لگا  عید کا دن ہے

دل دکھتا   ہے  ماں  باپ کا اس  روز مسلماں
ان   کو نہ کوئی    بات      سنا عید کا دن ہے

کچرے   کی  صفائی  میں ٹرافک میں لگا ہو
معلوم نہیں    مجھ  کو کہ کیا عید کا دن ہے

بچتا ہو  گناہوں  سے تو کہتا ہوں میں تم سے
ذیشان    ہر اک    روز    مرا     عید کا دن ہے

✍ ذیشان اعظمی

हर दिन   बा खुदा दोस्ती    का ईद का दिन है
तोहफा यह   जिसे दे   दे खुदा ईद का दिन है

एक बार   मेरे घर पे    तू तशरीफ़   तो  ले आ
खुशबू   मेरी    सांसो में   बसा ईद का दिन है

मुद्दत से    मुलाक़ात   नहीं   तुझ   से   हुई है
इस साल तो घर अपने   बुला ईद  का दिन है

मुझ से ना तफरक़े   कि कभी बात किया कर
अब आ जा गले मुझको  लगा ईद का दिन है

दिल दुखता है मां बाप का इस रोज़ मुसलमां
उनको ना    कोई    बात सुना  ईद का दिन है

कचरे की सफाई    में    ट्राफिक    में लगा हूं
मालूम नहीं   मुझको कि  क्या ईद का दिन है

बचता हूं   गुनाहों   से   तो कहता हूं मैं तुमसे
ज़ीशान हर   एक रोज़   मेरा   ईद का दिन है

✍ ज़ीशान आज़मी

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