Tuesday, June 26, 2018

Utho taareek raato se koi suraj nikaalein hum

खुदा के हुक्म    के आगे    सरों को अब झुका लें हम
खुदा का नाम लें और  फिर नई दुनिया   सजा लें हम

हमारे    दोस्तों   की दोस्ती    नेमत     खुदा    की  है
अगर रूठा है   कोई   यार तो   उसको   मना   लें हम

बहुत ही   फासला रखते   हैं बद अख़लाक़  लोगों से
मगर अख़लाक़ अच्छा हो तो पलकों पर बिठा लें हम

खुदा हर शै पे   क़ादिर है   वह मंजिल भी दिखा देगा
क़दम राहे खुदा   में गर   फक़त   एक ही बढ़ा लें हम

गवांई मुल्क   कि ख़ातिर    उन्होंने    ज़िंदगी   अपनी
भला क्यों ना शहीदों    के लिए    आंसू    बहा लें हम

अंधेरा ज़ुल्म    का दिन    को लपेटे    जा रहा है अब
उठो तारीक   रातों    से कोई    सूरज    निकालें  हम

जहां ना ज़ुल्म    होता हो जहां    ना होती हो  नफरत
चलो ज़ीशान   ऐसा    आशियां    कोई   बना  लें हम

✍ ज़ीशान आज़मी

خدا کے حکم کے آگے سروں کو اب جھکا لیں ہم
خدا  کا نام  لیں  اور  پھر نئی  دنیا سجا لیں ہم

ہمارے  دوستوں  کی  دوستی نعمت خدا کی ہے
اگر روٹھا   ہے   کوئی   یار تو اس کو منا لیں ہم

بہت ہی  فاصلہ رکھتے ہیں بد اخلاق لوگوں سے
مگر اخلاق   اچھا  ہو تو    پلکوں پر بٹھا لیں ہم

خدا ہر   شئے پہ قادر ہے وہ منزل بھی دکھادیگا
قدم   راہِ خدا میں   گر فقط اک ہی بڑھا لیں ہم

گنوائیں   ملک   کی خاطر انھوں نے زندگی اپنی
بھلا کیوں   نہ شہیدوں  کے لئے آنسو بہا لیں ہم

اندھیرا ظلم   کا دن   کو    لپیٹے    جارہا ہے اب
اٹھو تاریک   راتوں   سے کوئی سورج نکالیں ہم

جہاں نہ    ظلم   ہوتا ہو جہاں نہ ہوتی ہو نفرت
چلو ذیشان   ایسا    آشیاں    کوئی    بنا لیں ہم

✍ ذیشان اعظمی

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