Tuesday, July 3, 2018

Dil ka maamala hai koi dil lagi nahi

ख़ौफे खुदा    नहीं तो    कोई बंदगी नहीं
बंदा नहीं जो शख्स  तो वह आदमी नहीं

नूरे खुदा से  मिलती है दुनिया को रोशनी
रोशन हैं घर   सभी के मगर  रोशनी नहीं

रखता हूं   मैं सलाम दुआ  लोगों से मगर
खुदगर्ज़   आदमी   से मेरी   दोस्ती  नहीं

है दुश्मन ए   खुदा से मेरी   दुश्मनी बड़ी
बाक़ी मेरी किसी   से कोई  दुश्मनी नहीं

उलझी हुई है आज भी शायर की शायरी
हर शेर मे गुलू   है    मगर   सादगी  नहीं

जिक्रे खुदा में करता   हूं मैं जिंदगी  बसर
दिल का  मामला   है कोई  दिल्लगी नहीं

हक़ का बयान करना सितमगर के सामने
ज़ीशान यह    तेरी    कोई  दीवानगी नहीं

✍ ज़ीशान आज़मी

خوفِ خدا  نہیں    تو کوئی   بندگی نہیں
بندہ نہیں   جو   شخص تو وہ آدمی نہیں

نورِ خدا سے   ملتی ہے    دنیا  کو روشنی
روشن ہیں گھر سبھی کے مگر روشنی نہیں

رکھتا ہوں  میں سلام دعا لوگوں سے مگر
خود غرض   آدمی سے مری دوستی نہیں

ہے د شمنِ  خدا سے    مری  دشمنی    بڑی
باقی مری   کسی  سے کوئی دشمنی  نہیں

الجھی ہوئی ہے آج بھی شاعر کی  شاعری
ہر شعر میں   غلو ہے   مگر   سادگی  نہیں

ذکرِ خدا   میں  کرتا ہوں میں زندگی  بسر
دل    کا معاملہ   ہے کوئی   دل لگی  نہیں

حق کا    بیان    کرنا    ستمگر   کے سامنے
ذیشان یہ    تری     کوئی   دیوانگی  نہیں

✍ ذیشان اعظمی

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