Saturday, November 3, 2018

Maanga tha jis ne haath usey sar diya gaya

بیٹا   ہر    اک  حسین کا حق پر    دیا گیا
اکبر دیا    گیا     کبھی     اصغر    دیا گیا

اسلام     کی    بقا کے   لئے دیکھئے    ذرا
آباد       فاطمہ     کا بھرا   گھر    دیا گیا

دردِ غمِ یتیمی     سکینہ    کو   شام   تک
بعدِ حسین       ہائے      برابر      دیا   گیا

ارمان     تھا     جہاد    کا سجاد    کو مگر
بیمار    کربلا    میں     اسے    کر    دیا گیا

منظر بدل    نہ جائے   مقاتل   کا اس   لئے
عبّاس    کے  جہاد    کو    رد     کر دیا گیا

تخت    یزید     ہل    گیا   دربارِ شام  میں
بیمارِ    کربلا    کو    جو     منبر    دیا گیا

کیوں شرم سار ہوتے نہ کوفہ کے لوگ سب
خطبہ  علی  کے  لہجے    میں بہتر دیا گیا

کوئی نہیں   ہے   شرط عزائے حسین  میں
ہر اک  کو اذن     ماتم     سرور     دیا  گیا

باطل کے منہ پہ گر یہ طمانچہ نہیں تو کیا
مانگا  تھا جس  نے  ہاتھ   اسے  سر دیا گیا

المختصر   یہ   کہتا ہے    ذیشان   کی قلم
دیں    کے   لئے  ہی   زہرہ    کا دلبر دیا گیا

✍ ذیشان اعظمی

बेटा हर    एक हुसैन    का हक़ पर दिया गया
अकबर दिया    गया कभी  असगर दिया गया

इस्लाम की बक़ा    के     लिए     देखिए ज़रा
आबाद फातिमा     का भरा     घर दिया गया

दर्दे ग़मे यतीमी,       सकीना    को शाम तक
बादे     हुसैन      हाय    बराबर     दिया गया

अरमान था जिहाद   का     सज्जाद को मगर
बीमार    करबला   में उसे    कर    दिया गया

मन्ज़र बदल न जाये मक़ातिल   का इस लिए
अब्बास के    जिहाद को   रद कर  दिया गया

तख्ते यज़ीद    हिल गया    दरबारे     शाम मे
बिमारे करबला   को जो   मिम्बर    दिया गया

क्यों शर्मसार    होते    ना   कूफे के लोग सब
खु़त्बा अली के    लहजे में  बेहतर दिया गया

कोई नहीं    है   शर्त       अज़ाए      हुसैन में
हर एक को इज़्ने    मातमे   सरवर दिया गया

बातिल के मुंह पे गर यह  तमाचा नही तो क्या
मांगा था जिस    ने हाथ उसे    सर दिया गया

अल मुख्तसर यह कहता है ज़ीशान की क़लम
दीं के लिए ही ज़हरा   का दिलबर   दिया गया

✍ ज़ीशान आज़मी

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