Tuesday, November 20, 2018

Madine ke chiraagoN se shanaasaai zaroori hai

इबादत   के    लिए    ईमाने    यकताई    ज़रूरी है
हर एक इंसां  मे इल्मे  दीं    की    गहराई ज़ुरूरी है

नबी के क़ौल पर  चलना   बड़ा  आसान है लेकिन
कभी पाकीज़गी की और दिल की बिनाई ज़ुरूरी है

अगर अख़लाक़   आला चाहिये   तुम को जमाने में
मोहम्मद की   इताअत   करना भी   भाई ज़ुरूरी है

नबी की जिंदगी पढ़ कर वही  तालीम हासिल कर
हर एक इनसां के अंदर  उन की अच्छाई  ज़ुरूरी है

खुदा का क़ुर्ब हासिल   करना है   तो जाग रातों में
इबादत     के    लिए    ऐ  बंन्दे तन्हाई    ज़ुरूरी है

अगर नूरे हिदायत    मुस्तफा  का    चाहिए तुमको
मदीने के    चिरागों     से      शनासाई     ज़ुरुरी है

लबो को खोल दे तू जान की हरगिज़ न कर परवाह
अगर हक़   के    लिए    ज़ीशान    गोयाई ज़ुरुरी है

✍ ज़ीशान आज़मी

عبادت   کے     لئے    ایمانِ یکتائی    ضروری ہے
ہراک انساں میں علمِ دیں کی گہرائی ضروری ہے

نبی    کے      قول      پر   چلنا بڑا آسان ہے لیکن
کبھی    پاکیزگی  اور  دل کی بینائی ضروری ہے

اگر اخلاق    اعلی    چاہئے    تم    کو زمانے میں
محمد کی    اطاعت  کرنا بھی بھائی ضروری ہے

نبی کی   زندگی    پڑھ  کر وہی تعلیم حاصل کر
ہر اک   انساں کے  اندر ان کی اچھائی ضروری ہے

خدا کا قرب حاصل   کرنا  ہے تو جاگ راتوں میں
عبادت   کے   لئے    اے بندے   تنہائی  ضروری ہے

اگر   نورِ ہدایت    مصطفی     کا    چاہئے  تم کو
مدینے     کے    چراغوں  سے شناسائی ضروری ہے

لبوں کو  کھول دے تو جان کی ہرگز نہ کر پرواہ
اگر   حق کے    لئے    ذیشان   گویائی ضروری ہے

✍ ذیشان آعظمی

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